Text selection Lock by Hindi Blog Tips

Flag counter

free counters

Tuesday, August 7, 2007

मुन्ना भाई मीट्स हिंदी ब्लागर्स-1

मुन्ना भाई मीट्स हिंदी ब्लागर्स-1

पता नहीं किस मूहूर्त में नारद के अधिकतर हिंदी ब्लागर्स ने तय किया कि एक वृहत ब्लागर्स मीट आयोजित कर सारी दुनिया फ़ैले नारद भक्तों को बुलाया जाए। तय यह हुआ कि यह मीट रखी जाएगी मुंबई में। बस फ़िर क्या था फ़टाफ़ट सारी दुनिया में फ़ैले नारद भक्तों के फोन खड़खड़ाए जाने लगे, ई-मेल पर ई-मेल भेजे जाने लगे कि किसी भी हालत में आपको आना ही है।तय तारीख को मुंबई निवासियों ने देखा कि क्या बात है आज जुहू बीच पर अजीब तरह के लोग कुछ ज्यादा ही दिख रहे हैं जो आपस में ना जाने क्या बातें कर रहे हैं। कभी कभी तो ऐसा लगा कि बस अब लड़ाई होने ही वाली है। पर नहीं यह अजीब लोग तो आपस में कुछ विवादस्पद विषयों को लेकर बहस मात्र कर रहे थे। खैर! जैसा कि मुंबई वासियों की आदत है अपने में ही व्यस्त रहने की तो बस यही सब सोचते रहे और टहलते हुए वहां से निकल लिए।जुहू बीच पर जो कुछ ज्यादा ही अजीब लोगों की भीड़ दिखाई दे रही थी ये और कोई नहीं सब "नारद मुनि" के भक्त हिंदी के चिट्ठाकार थे जो कि आओ प्यारे सिर टकराएं की तर्ज पर आपस में चिंतन-मनन,विचार-विनिमय में लगे हुए थे। बीच-बीच में जुहू बीच को हिला देने वाली किन्हीं एक दो सज्जनों की भी हंसी भी गूंज रही थी। वहीं एक "सज्जन" टी-शर्ट और घुटन्ना (बरमूड़ा) पहने अपने ही बनाए "स्पेशल काकटेल" चुसकते हुए अपने आस-पास बैठे युवाओं से जिस अंदाज़ से बतिया रहे थे उस से स्पष्ट समझ आ रहा था कि वह गुरु हैं और आसपास बैठे युवा उनके शिष्य। अपने शिष्यों को शिक्षा देते हुए यह सज्जन बीच-बीच में जोर से "अहा आनंदम-आनंदम" कहे जा रहे थे क्योंकि ना चाहते हुए भी उनकी नज़र आस-पास भटकना चाह रही थी पर उनका एक "शिष्य" उनसे पहले से ही अपनी नज़रें आसपास भटका रहा था। दरअसल आसपास बहुत सी फ़िरंगी मेम छतरी तान कर धूप स्नान कर रही थी।दूसरी तरफ़ ब्लागर कम पत्रकारों की जमात में सब आपस में दुखड़ा रो रहे थे। दुखड़ा कुछ यूं था- "यार क्या करें हम तो बंधुआ मजदूर हो कर रह गए हैं। बस इससे कुछ सवाल पूछो,उससे कुछ सवाल पूछो वह भी विवादास्पद सवाल। बस पब्लिक की पसंद के चक्कर में उपर का आदेश मानते हुए टी आर पी बढ़ाने वाले मामले कवर करने में लगे रहते हैं। अपनी मर्जी से तो कुछ कर सकते नहीं,ले दे कर यह एक ब्लाग नाम की चीज मिली जहां कम से कम अपनी पसंद का कुछ लिख तो सकते हैं भले ही वह और ज्यादा विवादास्पद हो। पर यहां आने के बाद तो क्या गली क्या "मोहल्ला" और क्या "कस्बा" सब जगहों के बच्चे तक मुंह चिढ़ाने लगे हैं। खैर! हम पत्रकार हैं हार कैसे मान लें हम लिखते रहेंगे, मुद्दे उठाते रहेंगे और लोगों को जागरुक बनाते रहेंगे।इधर कंप्यूटर, तकनीकी और चिट्ठा विशेषज्ञ ब्लागर्स भी बैठे हुए थे । यह सब इस उधेड़बुन में लगे थे कि ब्लागर्स के लिए नई बातें,नई तकनीकें सामने लाएं तो कहां से और किस तरह की।ध्यान देने लायक बात यह थी कि इस वृहत ब्लागर मीट में बहुत सी महिला ब्लागर भी मौजूद थीं। "रत्ना की रसोई" के पकवानों को चखकर तारीफ़ करते हुए आपस में चर्चा कर रही थी। इनके बीच चर्चा का सबसे पहला मुद्दा यह था कि कौन दफ़्तर और घर के कामों के बाद भी ज्यादा से ज्यादा पोस्ट लिखने में सफ़ल है। साहित्य-दुनिया-मनोविज्ञान-आत्मिक उर्जा के अलावा भी सब महिला ब्लागर दिलोजान से जो एक खास चर्चा कर रही थी बस वही,वही एक चर्चा पुरुषो के लिए अनझेलेबल थी क्योंकि वह चर्चा थी मेकअप,साड़ी,गहने और शापिंग पर।इन सबके बीच सबसे खास बात जो किसी को नहीं मालूम थी वो यह कि मुंबई के फ़िल्मी ब्लागर्स के माध्यम से सरकिट को इस ब्लागर्स मीट की खबर किसी तरह लग गई थी। दोपहर खत्म होते होते सरकिट पहूंच गया मुन्नाभाई को लेकर इन नारद भक्तों के बीच। मुन्नाभाई को देखकर सभी चिट्ठाकर खुश हो गए कि चलो आज का दिन सफ़ल तो हुआ।लेकिन मुन्ना थोड़े टेंशन में दिखाई दे रहा था,अचानक बोला " क्यों रे मामू लोग तुम लोग अपने को क्या समझेला है, साला क्या बोलते हैं इसको ये बिलाग तुम्हारे घरीच की खेती है क्या। अपुन को साला ये सरकिट ने बताया कि भाई ये बिलाग अब हिंदी में भी बनेला है तो अपुन बोला अपन भी बना लेते है थोड़ा रोल और हूल देने के काम आएंगा पब्लिक को। अपुन ने वो डिब्बा, ए सरकिट क्या बोलते वो डिब्बे को" सरकिट ने फ़ौरन जवाब दिया"भाई, कंपूटर। मुन्ना फ़िर शुरु हो गया " हां वईच,अपुन ने कंपूटर जुगाड़ा,वो वो इंटरनेट कनेक्सन जुगाड़ा और फ़िर एक पढ़ा लिखा श्याणा बंदा 'हायर' किया जो कंपूटर और उसपे लिखने कू जानता। उसीच श्याणे ने अपुन को वो क्या नाम है नारायण-नारायण वाले का,हां नारद। नारद के बारे में उसी ने बताया अपुन को। अपुन बोला नारद पे बाकी सब को रोकने का और सबसे पहले अपुन का रजिस्ट्री करने का मांगता,अपुन का लिखा अक्खा दुनिया का लोग पढ़ेंगा और क्या। पन दो-तीन दिन बाद वो मेरे कू बोला भाई नारद ने अपना बिलाग रजिस्ट्री करने से मना कर दियेला है। काएकू पुछने पे बताएला कि खाली हिंदी चलता उधर । अपुन ने पुछा इस श्याणे से कि अपुन क्या कोई फ़ारेन लेंग्वेज बोलता क्या तब उसने दिखाया कि नारद वालों को कैसी हिंदी मांगता। साला देखकेइच अपुन का भेजा घुम गएला है। वो क्या है ना भाई लोग कि अपुन को लिखने का नई आता उपर से कंपूटर पे लिखना तो औरीच नई आता ना इसीलिए अपुन ने इस बंदे को ठीक करेला। अपुन बोलता जाता है और ये 'हायर' किया बंदा ठीक वैसाईच लिखता जाता है। अब बोलो मामू लोग मेरे कू रजिस्ट्री देगा कि नई नारद पे?"

No comments: