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Friday, August 10, 2007

इंटरनेट के फ़िशिंग हमलों से कैसे बचें?

इंटरनेट के फ़िशिंग हमलों से कैसे बचें?


पिछले हफ़्ते मुम्बई पुलिस ने कुछ नाइजीरियाई नागरिकों को इंटरनेट पर चार-सौ-बीसी और धोखाधड़ी करने के आरोप में पकड़ा. उन पर आरोप था कि उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक की एक नकली साइट तैयार कर बैंक व ग्राहकों को करोड़ों रुपयों का चूना लगाया. उन्होंने बैंक के ग्राहकों को नकली ईमेल भेजकर कहा था कि कुछ कारणों से वे अपने पास-वर्ड और उपयोक्ता नाम अपडेट करें. ईमेल में कड़ी उस नकली साइट की थी जो हूबहू आईसीआईसीआई बैंक की असली साइट जैसा दिखता था. ग्राहक झांसे में आकर अपनी गोपनीय जानकारियाँ वहाँ डाल देते थे. अपराधियों ने यह जानकारी हासिल कर असली बैंक खातों से करोड़ों रुपए निकाल लिए और इंटरनेट बैंकिंग के ग्राहकों व सेवा प्रदाताओं को करोड़ों रुपयों का चूना लगाया. इस तरह की धोखा-धड़ी, जिसमें नकली साइट बना कर उपभोक्ताओं को ठगा जाता है, फिशिंग कहलाता है.


अपना शिकार फांसने के लिए अपराधी नकली साइटें इस तरह बनाते हैं कि वे पूरी असली लगें. एक सामान्य उपयोक्ता के लिए नकली और असली साइट में भेद करना मुश्किल होता है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर इंटरनेट ब्राउज़रों के नए संस्करणों में एंटी फ़िशिंग (फ़िशिंग के संभावित हमलों से बचाने के लिए चेतावनी) वार्निंग विशेषताएँ अंतर्निर्मित शामिल की जा रही हैं. ऑपेरा 9.01, फ़ॉयरफ़ॉक्स 2 तथा इंटरनेट एक्सप्लोरर 7 संस्करणों में आपको इस तरह की सुविधा मिलती है. जब आप इस सुविधा को सक्रिय करते हैं तो ये ब्राउज़र विविध भरोसेमंद स्रोतों से प्राप्त डाटाबेस को जाँच कर यह तय करते हैं कि जिस साइट की कड़ी को खोलने के लिए आपने क्लिक किया है वह सही है या नहीं. अगर कड़ी उनके पास उपलब्ध धोखाधड़ी की साइटों वाले डाटाबेस से मिलान करती है तो वे आपको चेतावनी संदेश देते हैं कि जिस साइट पर आप भ्रमण करना चाहते हैं वह धोखाधड़ी के उद्देश्य से तैयार की गई है, अतः वहाँ न जाएँ.


संभावित फ़िशिंग हमलों से बचने के लिए ऐसे संदेशों को गंभीरता से लें व उन्हें अनदेखा न करें.

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