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Tuesday, August 14, 2007

दिल्ली के भिखारी

दिल्ली के भिखारी



दिल्ली में आईटीओ चौराहे पर दिल्ली में एक नौजवान भिखारी भीख मांग रहा था। मैंने कहा- भीख
मांगते हो, अरे कुछ मेहनत किया करो।

भिखारी ने मुझसे पूछा-क्या आपने कभी भीख मांगी है।

मैंने हैरान होकर कहा-नहीं।

फिर आपको क्या पता कि भीख मांगना कितनी मेहनत का काम है-भिखारी ने बताया।

सच्ची में भीख मांगना बहुत मुश्किल काम है, ये पता लग रहा है दिल्ली सरकार चलानेवालों को
देखकर। बार-बार पब्लिक को बताना पड़ता है कि देखो यूपी वाले पानी की भीख नहीं दे रहे हैं,
दे रहे हैं, तो पूरा नहीं दे रहे हैं।

खबर है कि उत्तर प्रदेश सरकार भिखारियों का रिकार्ड तैयार कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार
भिखारियों की गिनती करायेगी। मैं यह सोचकर डर रहा हूं- सारे दिल्ली वाले भी उसमें शामिल
किये जायेंगे क्या।

दिल्ली वाले रोज यूपी सरकार से पानी मांगते हैं और साहब किस अंदाज से मांगते हैं। जैसे उधार
वसूल रहे हों, जैसे पानी की भीख देना उत्तर प्रदेश सरकार का कर्तव्य हो।

बहुत पहले, बहुत पहले मैंने एक हास्टल का भिखारी देखा था। हास्टल शहर से थोड़े दूर बने कालेज
का था। भिखारी हास्टल में लड़कों के कमरे के बाहर फुल जोरदारी से अपना कटोरा बजाता था और
कहता था कि समझ लो, यहां आकर भीख मांग रहा हूं, तुम पर अहसान कर रहा हूं। वरना इत्ती
दूर कौन आता है मांगने। चलो दे दो, तुम भी क्या याद रखोगे, इत्ती दूर आया मैं तुम्हे पुण्य का
मौका देने।

दिल्ली वाले जब पानी मांगते हैं, तो ऐसे ही लगते हैं-यूपी गवर्नमेंट हमको थैंक्यू के साथ पानी दो,
पुण्य का मौका दिया।

ये दिल्ली का कैरेक्टर है, मांगने का भी इस्टाइल है।

अब यूपी वाले पानी दे रहे हैं, जो नेताओं के ईमान से थोड़ा कम गंदा है।

दिल्ली वाले इस पर हाय-हाय कर रहे हैं-हाय गंदा पानी।

वैसे इस मौके का मुहावरा हो सकता है-भीख के पानी की गंदगी नहीं देखी जाती।

पर नहीं, दिल्ली का कैरेक्टर है, दिल्ली की स्टाइल है। दिल्ली वाले दान की बछिया के भी दांत
गिनते हैं।

यूपी वाले इस पर आगे कह रहे हैं-दिल्ली को पानी गंदा ही मिलेगा, क्योंकि दिल्ली वाले यमुना
को इतनी गंदी करके आगे भेजते हैं। दिल्ली में जब यमुना घुसती है, तो साफ होती है, निकलती है,
तो गंदी हो चुकी होती है।

ये भी साहब दिल्ली का कैरेक्टर है, कई नेता, सांसद जब दिल्ली में पहली बार घुसते हैं, तो

साफ होते हैं, जब यहां से निकलते हैं, तो यमुना से भी ज्यादा गंदे हो चुके हैं।

दिल्ली का कैरेक्टर है। दिल्ली की स्टाइल है।

दे दीजिये, अबे दे दे, नहीं देगा, तेरी तो ..................कुछ भिखारीनुमा आवाजें आ रही
हैं।

मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि ये पैसे मांगने वाले भिखारी हैं या यूपी से पानी मांगने वाले
भिखारी।

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