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Tuesday, August 7, 2007

संडे सूक्ति-हसबैंड उर्फ आठ सौ जीबी की मेमोरी

संडे सूक्ति-हसबैंड उर्फ आठ सौ जीबी की मेमोरी
संडे सूक्ति -हसबैंड उर्फ आठ सौ जीबी की मेमोरीवही हुआ, जो होना नहीं चाहिए था, पर हमेशा होता है।घर से आर्डर था कि भुट्टे लेकर आना, मैं खरबूज लेकर पहुंचा।मसला यूं सीधा सा था, आपसी सौहार्द्र से हल हो सकता था। पर नहीं हुआ जी।मैंने माफी मांगते हुए कहा-तो आज भुट्टे की जगह खरबूज खा लिये जायें।अच्छा तो भुट्टे और खरबूज में कोई फर्क नहीं है।नहीं फर्क तो है। पर एक दिन इसकी जगह उसे खा लें, तो क्या फर्क पड़ता है।अच्छा कोई फर्क नहीं पड़ता भुट्टे की जगह खऱबूज। कल को तो तुम यह भी कह सकते हो कि आज इस घर में ना आकर कहीं और चले जायें। मेरी जगह कोई और भी हो सकता है। कोई फर्क नहीं पड़ेगा तुम्हे। ये तुम्हे क्या हो गया है। तुम्हारे चरित्र को क्या हो गया है।बात खरबूजे से चलकर चरित्र पर आ जाती है।वैवाहिक जीवन कितनी बड़ी एब्सट्रेक्ट कविता है।कित्ती विकट एबस्ट्रेक्ट पेंटिंग है, जिसमें खरबूजे में भुट्टा घुसा हुआ है और भुट्टे में चरित्र।दरअसल सुनने में चूक हो गयी-मैंने फिर तर्क पेश किया।आजकल तुम मेरी सुनते ही कहां हो, पता नहीं किसकी सुनते हो-पलट जवाब आया।जब बातचीत इस फ्रीक्वेंसी पर पहुंच जाये, तो फिर स्पीकर फटने का डर हो जाता है। मैंने अपना स्पीकर आफ कर दिया।वरना जवाब तो अपने पास यह था कि –अब सब तो निराश हो चुके हैं, कोई इस काबिल नहीं समझता कि हमें सुनाये। सिर्फ तुम ही हो, जो अभी सुनाने का सम्मान देती हो।मेमोरी प्राबलम है साहब। अब इंसान की मेमोरी कित्ती, एक जीबी की भी न होगी, अगर कंप्यूटर की भाषा में कहें तो। इत्ते-इत्ते आइटम घुसे पड़े हैं, बास के मेमो, दफ्तर के डेमो, मेमोरी क्या करे।अभी एक अमेरिकन विद्वान से बात हो रही थी, उसने बताया कि चिंता न करें, इंसानी मेमोरी का इंतजाम कर रहे हैं। ऐसा जुगाड़मेंट होने वाला है, जिसमें बंदा सिर का ढक्कन खोलकर एक चिप डाल लेगा-ले बेट्टा हो गयी आठ सौ जीबी मेमोरी।टेंशन खत्म, पत्नी बात ही नहीं करेगी। पति काम कर रहा होगा, पीछे से उसका सिर खोलकर मेमोरी चिप निकालेगी, उस पर दर्ज कर देगी, इत्ते भुट्टे, उत्ते खरबूजे।हसबैंड दुकान पर जायेगा-दुकानदार हसबैंड का सिर खोलकर चिप पढ़ेगा और बांध देगा सब सामान।
भईया मजा सा आ लेगा।पर नहीं मामला इतना आसान नहीं है। यूं भी हो सकता है –किसी दिन हसबैंड सो रहा हो, उसका सिर खोलकर चिप में कुछ खुराफात कर दी जाये।अगले दिन संवाद कुछ यूं हों-इस बार मैरिज एनीवर्सरी पर कुछ गिफ्ट नहीं दी तुमने।पर मैरिज एनिवर्सरी तो 4 दिसंबर को आती है ना।लो तुम्हे कुछ याद रहता है, मेमोरी चिप चेक करो, 25 जून है।हसबैंड चिप निकालकर चेक करेगा, 25 जून निकलेगी।स्मार्ट बीबियां जब चाहे मैरिज एनीवर्सरी मना सकती हैं।एक तरकीब यह भी कि हसबैंड की मेमोरी चिप में से उसके सारे घरवालों को डिलीट कर दो।होशियार बहूरानी अपने पति की मेमोरी चिप से अपनी सास को ऐसा डिलीट कर सकती हैं, कि वह ट्रैश बाक्स में भी ना मिले।फिर सासू मां अपने बेटे से मिलने आयें।बेटा पूछे-माताजी किससे मिलना है।ऐसे सीन में बहूजी अपनी सास को गश खाकर गिरता भी देख सकती हैं।जिन रिश्तेदारों से बहूजी खुंदक खाती हों, उनके लिए और भी इंतजाम हो सकते हैं।मेमोरी चिप में सारे देवरों, जेठों की एंट्री बतौर कर्जदार कर दी जाये। जब भी जेठजी मिलने आयें,पतिदेव उनसे वसूली की बात कर उठें-जी हमारे पांच सौ करोड़ क्यों वापस नहीं करते।जेठजी गश खाकर गिर जायेंगे। दोबारा झांकेंगे भी नहीं।पति की तरफ के सारे रिश्तेदारों को इस तरह से मेमोरी चिप के जरिये भगाया जा सकता है।या फिर जेठजी की मेमोरी चिप में कुछ ऐसे खेल हो सकते हैं कि वे खुद ही दौड़े आयें और कहें की लो जी पांच करोड़ रुपये का कर्ज, जो मैंने आपसे लिया था। घर-दुकान सब बेचकर दे रहा हूं। चुन-चुनकर, गिन-गिनकर विरोधी पक्ष के रिश्तेदारों को ठिकाने लगाया जा सकता है।बस जी थोड़ा वेट कर लीजिये। इस चिप की पहली कापी मुझे ही मिलने वाली है।पुनश्च-अभी अमेरिका वाले एक्सपर्ट ने खबर दी है कि इस चिप को रिमोट के जरिये कंट्रोल किया जा सकता है, बिना सामने वाले की जानकारी के। यानी पति पत्नी एक-दूसरे की चिप में अपनी मर्जी की चिप-चिप कर सकते हैं।बुकिंग कराने के लिए फौरन संपर्क करें।पति और पत्नी अलग-अलग बुकिंग करायें, गोपनीयता की फुल गारंटी।और साहब सब छोड़िये कुछ शेर सुनिये, परवाज साहब के हैं-अपनी भूलों के लिए इतना भी मायूस न होकिससे होता है यहां फर्ज अदा, जाम उठामार डालेंगे तुझे होश के मारे हुए लोगजिद न कर, मान भी जा मेरा कहा, जाम उठा

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