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Saturday, August 4, 2007

अरे रुक जा रे बन्दे,

अरे रुक जा रे बन्दे,

वो मर चुका है , वो जल चुका है

अब आग लगाते हो कहाँ,

था आशीयाँ जिसका वो गुज़र चुका है

बंद कर ये लहू बहाना,

नफरत की फसल उगाना,

काट ये आग उगलते नाखून,

जाने कितनी जिंदगी खुरच चुका है

छाती तेरी कब ठंडक पायेगी,

मुर्दो की बस्ती तुझे कब तक भायेगी,

ये सफेदी का काला रंग कहां तक उडायेगा,

तेर घर भी रंग ये निगल चुका है

अरे रुक जा रे बन्दे, रुक जा,

वापसी का दरवाजा हमेशा खुला है

अब आग लगाते हो कहाँ,

था आशीयाँ जिसका वो गुज़र चुका है

छाती तेरी कब ठंडक पायेगी,

मुर्दो की बस्ती तुझे कब तक भायेगी,

ये सफेदी का काला रंग कहां तक उडायेगा,

तेर घर भी रंग ये निगल चुका है

अरे रुक जा रे बन्दे, रुक जा,

वापसी का दरवाजा हमेशा खुला है

छाती तेरी कब ठंडक पायेगी,

मुर्दो की बस्ती तुझे कब तक भायेगी,

ये सफेदी का काला रंग कहां तक उडायेगा,

तेर घर भी रंग ये निगल चुका है

अरे रुक जा रे बन्दे, रुक जा,

वापसी का दरवाजा हमेशा खुला है

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