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Friday, August 10, 2007

Hindi kavita रिश्तो के मायने

रिश्तो के मायने



समय के साथ रिश्तो के मायने बदल जाते हैं
कल तक जिन के कंधों पर चढ़कर
घूमा करते थे हम
वहीं आज हमारे कंधे
उनके काँपते हाथों का सहारा हैं
उन्ही हाथों का
जिन्होने हमे जन्म से संभाला
चलना सिखाया
गिरने पर उठाया
प्यार से सहलया
चपत लगा एक प्यार भारी
सही ग़लत में फ़र्क सिखाया.

ये क्या है आख़िर ?
प्रकृति का नियम
या रिश्तो के बदलते मायने ?

आओ इसके लिए वक़्त को ज़िम्मेदार कहें



आओ इसके लिए वक़्त को ज़िम्मेदार कहें
आओ इसके लिए वक़्त को ज़िम्मेदार कहें
एक वक़्त था
जब हम
साथ रहते थे हमेशा
घर में स्कूल में
मैदान की धूल में

लेकिन आज छह कर भी मिल नही पाते
ना जाने तुम कहाँ हो
पर मुझे ख़ुद की भी तो ख़बर नही
ना जाने क्या हुआ है
ख़ुद को खो चुका हू
ऐसे में कैसे ढूँढु तुम्हे
कहाँ ढूँढूं तुम्हे ?
सोचता था पहले की तुम बदल गये हो
या फिर मैं ख़ुद बदल गया हू
लेकिन
आज दफ़्तर से आक्र एहसास हुआ
कि ग़लती हमारी नही
जीने के लिए पैसा चाहिए
दोस्ती और भावनाएँ नही
और इस चाह में सभी बंधे हैं
आप भी और मैं भी
दोष हमारा नही है
आओ इसके लिए वक़्त को ज़िम्मेदार कहें
शायद वक़्त ही बदल गया है

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