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Thursday, August 23, 2007

घरेलू उपचार

घरेलू उपचार .... डॉकटर की सलाह अवश्य ले . .

मुह के छाले

पके हुए ताज़े नारीयल मे से दूध निकाल कर मुह के अंदर कई बार लगाने से आराम मिलेगा

चक्कर

यदि आपको चक्कर आ रहे हो , उलटी जैसा एहसास हो रहा हो तो बिना शक्कर की काली चाय ( दूध विहीन ) की चुसकिया दिन मे 3 - 4 बार लेने से आराम मिलेगा


तलवो मे जलन

एक मुठठि करेले के पत्तो को पिसकर बारीक पेस्ट बनाए और तलवो व हथेली पर लगाने पर जलन नही होगी

मुहासे

बराबर मात्रा मे नींबू का र स और गुलाब जल मिला ले , चेहरे पर लगाने के आधा घंटा बाद चेहरा ताज़े पानी से धो ले , दो सप्ताह मे मुहासे दूर हो जाएँगे

खाँसी

अद्रक का रस और शहद बराबर मात्रा मे मिलाकर दिन मे 4 बार चाटने से कफ़ ( खाँसी ) दूर हो जाती है



कब्ज नाशक

कहावत है की कब्ज अनेक रोगो का गढ़ है , अगर आपको भी कब्ज की शिकायत है : तो निम्न उपाय करे

* पपीते का सेवन

* नाशपाती का रस पीना

* विटामिन युक्त व प्राकृतिक लवणो से भरपुर मकोय का रस

* सूबह ख़ाली पेट ताज़ा पानी पीना

* अमरूद के छिलके व बीज सहित खाना

* भोजन करने के बाद 2 या 3 अंज़ीर खाना

* भोजन खाने के पश्चात कच्चा प्याज़ खाना

* बिना नमक व चीनी मिलाए बेल के शरबत का सेवन

* धनिया , काला नमक , व काली मिर्च की चटनी बनाकर चाटना

* मीठे संतरे के रस को ख़ाली पेट पीना

* गुनगुने दूध के साथ त्रीफ़ला चुर्ण का सेवन

* हरड को रात पानी मे भिगाकर रख दे , सूबह थोड़ी सी हरड उसी पानी मे रगडे और थोड़ा नमक़ मिलाक़र पिए

* मेथी के पत्तो की सब्ज़ी खाना

* रात को सोने से पेहले गोबी के रस का सेवन

* कच्चे पालक़ के रस का सेवन

* बथुए का साग खाना

* ख़ाली पेट सेब खाना

* रात को हरड का मूरब्बा खाने के बाद दूध पीने से पेट साफ होता है

Download JAVA for computers !!!

Hello everybody ,

If you need to Download JAVA for your home PC , here is the link , go to the webpage and download JAVA for your home PC . . . you need internet connection .

Here is the link ,

http://java.com/en/download/windows_ie.jsp?locale=en&host=java.com

Happy downloading !!

Regards .

देव आणि TV : Marathi Kavita

Posted by Abhijit Galgalikar

http://abhijitag.blogspot.com

देव आणि 'TV'


देवाने विचार केला, TV घेउन यावा
एवढं त्यात काय आहे, आपणही बघावा

सकाळी भाविक प्रवचनं बघून
देव मोठा खुश झाला
एकापेक्षा एक भेसुर बाबा पाहून
मात्र स्वतःच थोडासा घाबरला

नंतर लागल्या मुख्य बातम्या
ब्रेकिंग न्यूजने धक्काच दिला
आपली मुर्ती दुध पिते कशी
तो स्वतःही विचारात पडला

आल्या मग पौराणिक मालिका
सादर कथा त्या अनामिका
तासभर करमणुकीनंतर कळले
अरे हा वठवतोय आपलीच भुमिका!!

दुपारी होता सनीचा पिक्चर
ते पिक्चर एकाहुन एक बंपर
अचाट शक्तीने देवच वरमला
आता आपलं कसं, विचार करु लागला

त्यालाही मंदिरात जाताना पाहून
देवाच्या जीवात जीव आला
हिरोईनच्या मागे तो आलाय
हा छोटासा तपशील विसरला

मग 'K' सिरियल्स सुरु झाल्या
अफ़लातून स्त्रियांच्या कथा आल्या
नात्यांच्या गोत्यात तो फ़सला
अन फ़ारच संभ्रमात पडला


सत्तरच्या 'बा'ला पंचवीसची पणती
प्रेरणाच्या नवऱ्यांची नाही गिनती
सुनेपेक्षा सासू सुंदर कशी अन
तिनदा मरुन कुणी जिवंत कशी

प्रश्न त्याला सुटता सुटेना
अनोख्या खेळाचे नियम कळेना

पण त्याला एक समाधान झाले
मनुष्यकल्पनेचे कौतुक वाटले
आपली 'क्रिएशन' मोठी हुशार
'विश्व'कर्मा म्हणून त्यास धन्य वाटले

mGinger

If you wish NOT to receive invitations from your friends , about mGinger , please click on the link below . . .

You will need to put your mail Id , in the palce " put your mail Id here "


http://mGinger.com/BlockInviteService.svc?email=type your mail Id here

This is for your neat and clean inbox .... you will not receive any invitation on the mail Id you have provided here .

Happy inbox cleaning !!

Regards .

अप्राएझल

मेरे फ्रेंड के मेल से . . .

अप्राएझल

अप्राएझल के नाम एक लंबी आह भरते है
चलिए अब हम ईस दुखद कहानी की शुरू आत करते है

हमेशा की तरह 10 बजे ठुमकता हुआ ओफ़िस आया
11 बजे तक नाश्ता किया और 12 बजे तक सिर्फ़ मेल ही चेक कर पाया

मै बड़े ध्यान के साथ केयरफुल मेल पढ़ रहा था
तभी देखा मेरे साहब का एक मेल कोने मे ब्लिंक कर रहा था

फिर कोई ट्रेनिंग अटेंड करनी होगी , ये क्या मुसीबत है
क्या रिप्लाइ मे लिखू के मेरे मेल बॉक्स का आज उपवास है

मैने आँखे बंद की और 10 मी नट तक ओम ओम बोला
और प्रणाम करते हुए वो मेल खोला

साहब के ईस मेल मे एक अजब सा सुकून और भोलापन है
लिखा था भाईयो अप्राएझल लेटर आ गाये है अब तो वन टू वन है

मुझे लगा की व्हिबी के उपर यूनीक्स का कोड लिख दिया हो किसी ने
दिल बार बार धड़क रहा था जैसे डबल क्लिक किया हो जैसे किसी ने

मन मे ऐसे बुरे बुरे ख़याल आ रहे थे
उपर से कुछ लोग मेरे डिअप्राएझल की गंदी अफ़वाह उठा रहे थे

अप्राएझल आया ऐसे जैसे इंडिया मे मायकल जॅकसन आया हो
जैसे फुट बॉल टीम ने फिन लॅंड को हराया हो

आख़िर वो वक़्त आया
साहब ने एक एक करके सबको अंदर बुलाया

जो भी अंदर जाता सबको देखते जाता
जैसे ही बाहर आता , मुह छिपाता जाता

ऐसे लगता है वो रूम नही टाईम मशीन हो जो सबको अंदर लेती हो
और गुड टाईम से उठाकर बॅड टाईम मे लाकर छोड़ती हो

किसी को अप्राईझल मे 2000 रुपये मिले मै उसकी हसी उड़ा रहा था
तभी मैने देखा मेरा साहब मुझे इशारे से अंदर बुला रहा था

मै विश्वास से उठा और आगे क़दम बढ़ाया
तभी मेरी बेल्ट का बककल निकल के बाहर आया

मेरी हालत तो अभी से बुरी हो गयी
इज़्ज़त उतरना तो यही से शुरू हो गयी

मै अंदर पहुँचा , साहब ने मुझे बिठाया
उसने मेरा लेटर पढ़ा और वो हसी रोक ना पाया

जैसे ही उसने अप्राईझल लेटर मेरी तरफ़ बढ़ाया
मेरी आँखो के आगे घन घोर अंधेरा छाया

मुझे लगा की मेरी दिल की दीवार पे किसीने गोबर पोटा है
अरे यार 20 रुपये ये भी कोई इंक्रिमेंट है ?

ये सॉफ़्टवेयर इंडस्ट्री है कोई आखाड़ा नही है
ये सलरी इंक्रिमेंट है कोई दादर आने जाने का भाड़ा नही है

मेरी चारो तरफ़ काली घटा छाई
तभी मेरे साहब की सुथिन्ग की आवाज़ आई

तुम सोच रहे होंगे की क्या कंपनी का दिमाग़ फिर गया है ?
पर बेटा हम क्या करे डॉलर का भाव जो 2 रुपया गिर रहा है

पर फिर भी मुझे लगता है की ये लेटर फेक है
मुझे तो लगता है की ये प्रिंटिंग मिस्टेक है

तुम HR मे जाओ
और ये कनफर्म करके आयो

भाई HR मे जाने के लिए तैयार होना पड़ता है
वही तो एक ऐसी जगह है जहा लड़कियो से पाला पड़ता है

उसने मेरा लेटर खोला
और ख़ुश होके बोला

वो बोला सर आपके लिए ख़ूशखबरी है
आपके लेटर मे प्रिंटिंग मिस्टेक पकड़ी है

मैने कहा अब और देर ना लगाना
मुझे मेरा अकचुअल आकाडा बताना

सॉरी सर लेकिन 20 रुपये का नही
सिर्फ़ 2 रुपये का इंक्रिमेंट है

मै बस वहा खड़ा था , कुछ समझ ना आ रहा था
मुझसे ज़्यादा तो सेक्यूरिटी वाला पा रहा था

मैने ख़ुद को संभाला , ख़ुद को उठाया
और मेरे साहब के पास वापिस आया

उसके बोलने से पाहिले ही
मै बोला

सर ये पैसे वापस ले लीजिए बात करना फ़ीजुल है
मै ग़रीब हू , लेकिन भिक नही लेता हू ये मेरा वसूल है

Sunday, August 19, 2007

लाईफ़ की रिंगटोन

लाईफ़ की रिंगटोन

मेरे दोस्त के मेल मिली कविता . . .

गम को करो डिलीट

ख़ुशी को करो सेव्ह

रिश्तो को करो रिचार्ज

दोस्ती को करो डाउनलोड

दुश्मनी को करो इरेज़

सच को करो ब्रॉडकास्ट

झूठ को करो स्विच ऑफ

टेन्षन को करो नोट रिचेबल

प्यार की करो ईनकमिंग ओन

नफ़रत की करो ओउटगोयिंग ओफ़

भाषा की करो कंट्रोल

हसी का करो ओउटबॉक्स फूल

आसू का करो ईनबॉक्स ख़ाली

ग़ुस्से को करो होल्ड

मुस्कान को करो सेंट

हेल्प का करो ओके

सेल्फ़ को करो ओटोलॉक

और दिल को करो वाइब्रेट

फिर देखो लाईफ़ की रिंगटोन कीत नी POLYPHONIC हो जाती है . . .

100 Not out . . .

My webpage is visited more than 100 times . . . I really thank all of them . . . who has visited my webpage and contributed in making me 100 Not out . . . hope to add more zeros in front of this . . .

When I started my webpage I was not sure , that some one will visit my webpage , but it seems people are visiting my webpage and I must be more cautious and sensible while maintaining this page . . . all suggestions , comments are MOST welcome . . .

Regards .

जागो ग्राहक जागो

जनहित मे जारी . . . जागो ग्राहक जागो

क्या आपको पता है ????

सरकार ने ग्राहको को शिकायते दूर करने के लिए टेलीकॉंम कंपनी यो ज़रूरी नियम जारी किए है . . .

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे वेबसाईट www.consumerhelpline.in

उपभोक्ता अधिकार अब आपके हाथ मे

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाईन

कॉल 1800 11 4000 ( National Consumer Helpline : Care of the common man )
( टो ल फ़्री नंब र : एम टी एन एल / बी एस एन एल )

या 011 - 27662955 से 59
( सामान्य कॉल दरे लागू )

कार्य दिवस 9:30 - साय 5:30


राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाईन आपकी सहायता के लिए ही है , किसी उत्पाद या सेवा मे ठगा गया महसूस कर रहे है ? कम वज़न ? अधिक मुल्य ? नियत तिथि पर सामान की डिलिवरी नही मिली या आप संतुष्ट नही ? हमे संपर्क करे और हम आपको बताएँगे की आपको क्या करना है .

Ministery of Consumer affairs

Consumer voice ... www.consumer-voice.org

Core centre ( Consumer Online Resource & Empowerment Centre )

www.core.nic.in

Tuesday, August 14, 2007

मुन्ना और सर्किट @ येरवडा (पुना)

मुन्ना और सर्किट @ येरवडा (पुना)


स्थल:- येरवडा जेल (पुना)

संवादः-मुन्ना और सर्किट

क्या बावा क्या हाल बना रखेला है।
चलता है रे सर्किट,यहीच तो लाइफ है।

भाई आप बोले तो कोदे को टपका दु ?
रुक बापू को पुछके बताता हुं ।

अरे नही नही भाई बापू को पुछने का अरमान छोडो ।
वरना तुम्हारा स्लोगनः येरवडा छोडो अन्दमान जोडो ।

ये सर्किट यहां पे बहोत बोर होता है रे ।
रुक जा तेरे लिये कुछ बन्दोबस्त करता रे ।

भाई सिंगर भी आजकल् एक्टर बन् रहेले है, इस लाइन मे अब मजा नही ।
कितनोंको अन्दर करवाया तुमने पर तुमको भी मीली सजा यही ।

जो हुआ अच्छेके लिये हुआ और होगा भी अच्छेके लिये ।
कौन बापू बोलाः भंकस,ये सब अपनी तसल्ली के लिये ।

मुन्नाभाई एक लाइफटईम आयडिया है।
नही रे मेरे पास तो पोस्टपेड एअरटेल है।

भाई मै मोबाइल की नही फ्युचर की बात कर रहा हुं ।
हां तो ऐसा बोल, पका मत मै सुन रहा हुं।

भाई सुना है पुनामे आयटी का बडा समोसा है।
टैक्स काहेका इन्कम तो तो पहिलेसे एक मे फसां है।

नही आयटी बोले तो कम्प्युटर- इन्टरनैशल टेकनिक मुन्नाभाई ।
हां तो ये आयटी आपुन् लोगोन्को तो बहोत भाई ।

छं साल के बाद क्या ये सोचनेवाली बात है।
तभीच तो बापू बोला;कर अच्छी शुरुवात ये ।

मुन्नाभाई और आयटी इन्जी. कैसी अजीब बात है।
डाक्टर तो बन गया ये आयटी इन्जी. कौनसी बडी बात है।

'JAVA',सुमात्रा घुम चुका हुं'।
'c' क्या मै तो 'A' टु 'Z' जान चुका हुं।

बताओ भाई- सराफ को SMS,अझिम को Mobile ,मुर्ति को फोन करे ?
ना रे 'D' को बोल के 'Bill' को मेरा CV फोरवर्ड करे ।

ए सर्किट कहिसे एक LAPTOP सेट कर दे।
साथमे स्पीडवाला ब्रौडबैन्ड कनेक्ट कर दे।

मै मुन्ना तु सर्किट।
लेटस् स्क्रैप औन और्कुट।

सुना है के सोनी सोनी कुडियोंदे मजे होते है।
टौक, बोल,चैट, इ-मेल मे सजे होते है।

पर भाई मान्यता?.............. अरे छोड ना यार!

और भाई बापु-----------------

साला बिगाड दिया ना कैरिअर...................


--सबका क्षमाप्रार्थी,

मन के मैल का वाशिंग पाऊडर उर्फ छोटी लुच्चई

मन के मैल का वाशिंग पाऊडर उर्फ छोटी लुच्चई


सामने उन्तीस ब्रिटिश पौंड का चेक पड़ा है यानी दो हजार रुपये से ज्यादा की रकम। यह रकम
मैंने गरीबी से कमाई है। एक इंटरनेशनल शोध संगठन ने भारत में गरीब बच्चों पर रिपोर्ट जारी की
थी। एक विदेशी मीडिया हाऊस ने इस पर मेरे विचार चाहे थे, जो मैंने करीब सौ शब्दों में व्यक्त
किये थे। गरीबी इतने चकाचक रिटर्न देती है, पहले पता नहीं था।
गरीबी से कमायी गयी दो हजार रुपये की अमीरी में मैं अपराधबोध और शर्म में डूब ही रहा था
कि एक सीनियर प्रोफेसर ने बताया कि वह न्यूयार्क जा रहे हैं, गरीबी पर इंटरनेशनल लेक्चर देने।
गरीबी का यह टूर उन्हे करीब दो लाख रुपये से अमीर कर देगा, उन्होने बताया।
उनके दो लाख रुपये के आगे मेरी उन्तीस पौंड की शर्म कुछ कम हो गयी।
शर्म से पार पाने का यही सही फंडा है आजकल।
किसी की जेब काटने का अपराध बोध हो, तो वह खबर पढ़ लेनी चाहिए कि लुटेरों में माल लूटकर
हत्या भी कर दी।
मन हल्का हो जाता है, देखो, हम कितने करुणावान, किसी की जान नहीं लेते।
चारे में रकम खाने की शर्म परेशान कर रही हो, तो वह खबर पढ़नी चाहिए, जो बताती है कि
नेताजी गरीब बच्चों के दूध के लिए रखी गयी रकम खा गये।
मन का मैल कम हो जाता है। अपने बारे में पावन विचार उठने लगते हैं-हाय हम कितने दयालु बच्चों
को नहीं मारते।
यह तरकीब मुझे इनकम टैक्स विभाग के एक चपरासी ने सिखायी थी।
रिश्वत लेते हुए वह बताता था-जी हम तो लाख दरजा अच्छे हैं, उस वाले सरकारी अस्पताल को
देखिये। वहां पोस्टमार्टम विभाग के चपरासी लाश को हैंड ओवर करने तक के लिए रिश्वत खाते हैं।
हम कितने अच्छे, सिर्फ इनकम में से रिश्वत निकालते हैं, लाश से नहीं।
कमीनेपन को विकट घनघोर कमीनेपन के आगे रख दें, यह तरकीब मन के मैल का सर्फ एक्सेल साबित
होती है।
खैर प्रोफेसर साहब दो लाख कमायेंगे गरीबी से, मैं सिर्फ दो हजार। यह फर्क है लोकल और
इंटरनेशनल का। अमेरिका वाले गरीबी की कदर ज्यादा करते हैं।
गंजबासौदा के एक कालेज से व्याख्यान के लिए निमंत्रण आया है कि गरीबी पर व्याख्यान दे जाइए।
बस से आने-जाने का किराया और दो सौ इक्यावन मानदेय देंगे।
मरभुख्खे, गरीब गंजबासौदा वाले, चले हैं इतनी सी रकम में चले हैं गरीबी पर व्याख्यान सुनने।
गरीबों को गरीबी पर व्य़ाख्यान सुनाना बेकार है जी।
गरीबी पर व्य़ाख्यान सिर्फ उनको सुनाना चाहिए, जो उसे अफोर्ड कर सकें।
एड्स, एड्स के बारे में तुम्हारे क्या विचार हैं-सीनियर प्रोफेसर मुझसे पूछ रहे हैं।
बहुत खतरनाक बीमारी है-मैं बता रहा हूं।
अरे, खतरनाक सबके लिए नहीं है। अफ्रीका में एड्स-इस पर एक रिसर्च पेपर तैयार करो, कनाडा से
पांच लाख दिलवा सकता हूं। एड्स का चकाचक सीजन है आजकल।-प्रोफेसर कह रहे हैं।
पर अफ्रीका के एड्स पर कनाडा में पेपर, इसका क्या मतलब है-मैंने प्रोफेसर से पूछा।
अफ्रीका के लोग अफोर्ड कहां कर सकते हैं एड्स पर रिसर्च। अरे रिसर्च वहां के लिए तो की
जायेगी, जहां वाले अफोर्ड कर सकते हैं-प्रोफेसर ने कहा।
दोस्तो अब मैं एड्स पर रिसर्च में लग गया हूं, जब कभी अपराधबोध और शर्म में डूबता हूं, तो उन
प्रोफेसरों को देख लेता हूं, जो इराक में मरते लोग और लोकतंत्र की विजय नामक विषय पर शोध
कर रहे हैं।
मन का मैल मिट जाता है।

कुछ फेयर औऱ हैंडसम प्रश्नोत्तर-महिलाएं इसे एकदम ना पढ़ें

कुछ फेयर औऱ हैंडसम प्रश्नोत्तर-महिलाएं इसे एकदम ना पढ़ें



सवाल-महिलाओं के लिए फेयर एंड लवली क्रीम थी पर पुरुषों के लिए फेयर एंड हैंडसम क्रीम आयी है।
क्या पुरुषों को लवली नहीं होना चाहिए। उनका काम सिर्फ हैंडसम होने से चल जाता है क्यों।

जवाब- हैंडसम का मतलब है हैंड में सम यानी रकम, तब ही पुरुष का मामला जमता है। उनका काम
सिर्फ लवली होने से नहीं चलता। वैसे अब तो महिलाओं का भी हैंडसम होना जरुरी है। सिर्फ लवली
के बाजार भाव बहुत डाऊन हैं।

सवाल-जो पुरुष फेयर एंड हैंडसम नहीं लगाते, वे क्या हैंडसम नहीं होते।

जवाब-नहीं चुपके से लगाते होंगे। बताते नहीं है, क्या पता बाद में बतायें। जैसे बरसों तक अमिताभ
बच्चन की शानदार एक्टिंग देख कर सब समझते रहे कि अमिताभजी की मेहनत-समर्पण इसके पीछे है।
पर उन्होने अब जाकर बताया कि वो वाला तेल, ये वाली क्रीम, ये वाला कोल्ड ड्रिंक, वो
वाला च्यवनप्राश इसके लिए जिम्मेदार हैं। असली बात लोग बाद में बताते हैं जी।

सवाल-पुरुष हैंडसम हो जाये, तो क्या होता है।

जवाब-बेटा क्लियर है, ज्यादा कन्याएं उसकी ओर आकर्षित होती हैं।

सवाल-क्या पुरुष के जीवन का एकमात्र लक्ष्य यही है कि कन्याएं उसकी ओर आकर्षित हों।

जवाब-नहीं इमरान हाशमी की तमाम फिल्में देखकर पता लगता है कि पुरुषों का लक्ष्य दूसरों की
पत्नियों, विवाहिताओं को आकर्षित करना भी होता है।

सवाल-मैं अगर फेयर एंड हैंडसम लगाऊं और फिर भी सुंदरियां आकर्षित न हों, तो क्या मैं कंपनी पर
दावा ठोंक सकता हूं।

जवाब-नहीं, तमाम इश्तिहारों के विश्लेषण से साफ होता है कि सुंदरियां सिर्फ क्रीम लगाने भर से
आकर्षित नहीं होतीं। इसके लिए वह वाला टायर भी लगाना पड़ता है। इसके लिए वो वाली बीड़ी
भी पीनी पड़ती है। इसके लिए वो वाली सिगरेट भी पीने पड़ती है। इसके लिए वो वाली खैनी भी
खानी पड़ती है। इसके लिए वो वाला टूथपेस्ट भी यूज करना पड़ता है। इसके लिए वो वाला कोल्ड
ड्रिंक भी पीना पड़ता है।

सवाल-बंदा इसी सब में सुबह से शाम तक बिजी हो जायेगा, तो फिर वह और काम क्या करेगा।

जवाब-हां,यह सब इश्तिहारों में नहीं बताया जाता कि सुंदरियों को आकर्षित करना पार्ट-टाइम
नहीं फुल टाइम एक्टिविटी है।

सवाल-तमाम इश्तिहार पुरुषों से आह्वान करते हैं कि वे ये खरीद कर या वो खऱीद कर सुंदरियों को
आकर्षित करें, पर सुंदरियों से यह आह्वान नहीं किया जाता कि वे ये वाला टायर खरीदकर या वो
वाली सिगरेट पीकर या बीड़ी पीकर या टूथपेस्ट यूज करके पुरुषों को आकर्षित करें। इसका क्या
मतलब है।

जवाब – इसका यह मतलब है कि इस देश की महिलाएं सहज और स्वाभाविक रुप से आकर्षक हैं, पर
ऐसा पुरुषों के बारे में नहीं कहा जा सकता। सो महिलाओँ को आकर्षित करने के लिए उन्हे किसी
टायर, किसी सिगरेट, किसी बीड़ी की जरुरत पड़ती है।


संक्षेप में हम कह सकते हैं इस देश की महिलाएं स्मार्ट और आकर्षक हैं।


और पुरुष ढीलू, चिरकुट, घोंचू च घामड़ हैं।

अजन्मी बच्ची के अप्नी मां से प्रश्न

अजन्मी बच्ची के अप्नी मां से प्रश्न


इक सुबह इक कली टूटी
और मेरे आंगन मे आ गिरी
रो रही थी बिलख रही थी
मुझको चीख पुकार सुनयी पडी
मै उसके समीप गया
उसको थोडा सहला दिया
फ़िर उससे कारण पुछा
उसने ना कुछ जवाब दिया
फ़िर अचानक वो बोली
कि मै इक अजन्मी बच्ची हूं
मेरी मां ने
कोख मे मेरा कत्ल किया
इक कली को
फ़ूल बनने से पहले मसल दिया
फ़िर उसने वो प्रश्न किये
आंखो मे आंसु मेरे ला दिये

और फ़िर वो अपनी मां से कुछ सवाल करती है उन सवालो ने मुझको अन्दर तक झकझोर कर रख दिया

वो कहती है
कि ए मां मां ए मां
मेरी क्या गलती थी
जो तुने कोख मे मुझे मिटा दिया
जन्म तो मुझको लेने देती
क्यो पहले ही मेरा बलिदान किया

ए मां
मैने तो तुझको इतना चाहा था
कि मै ना खेली कोख मे तेरी
शांत सब्र से बैठी रहती
कहीं तुझको दर्द ना हो
तेरे दर्द की खातिर सिमटी रहती
पर क्या अहसास तेरे सब मर गये थे
क्या तुझको ना दर्द हुआ
जब तुने मारा मुझको
क्या तेरे सीने मे ना तीर गडा

ए मां
मै भी तो झांसी की रानी बन सकती थी
इन्दिरा गांधी कल्पना चावला हो सकती थी
क्यो तुने मुझ पर ना विश्वास किया
नाम को तेरे रोशन करती
क्यो पहले ही गला तुने मेरा घोट दिया

ए मां
मै भी इस दुनिया मै आना चाहती थी
तेरी गोद मे सर रखकर सोना चाहती थी
तेरे स्नेह के सागर से
कतरा दो कतरा चाहती थी
पर क्यो तुने कोख को अपनी श्मशान किया
क्यों तुने मुझको कोख मे अपनी जला दिया

खैर कोई बात नही मां
तेरी भी कोई मजबूरी होगी
जिसने जननी को हैवान किया
अब तू जीना सुख चैन से
मैने अपना कत्ल तुझे माफ़ किया

98.88 परसेंट पर फेल

98.88 परसेंट पर फेल



कभी सोचता हूं कि सही टाइम पर धरती पर आ गये, और बहुत पहले ही स्कूल की शिक्षा से पार
हो गये, इज्जत बच गयी। तीस-बत्तीस साल पहले स्कूली इम्तहानों में सत्तर परसेंट आते थे, तो पूरे
मुहल्ले में कालर ऊपर करके चलते थे।

अभी मेरी बेटी के 98.88 परसेंट आये हैं, पांचवी क्लास के मंथली टेस्ट में। घर में ऐसा माहौल है जैसे
फेल हो गयी है। उसकी मम्मी डांट रही है-फर्स्ट से लेकर टेन तक कोई पोजीशन नहीं आयी। शेम शेम


98.88 परसेंट पर शेम। हाय री स्कूली शिक्षा निराला तेरा गेम।

बेटी परेशान नहीं है, उसकी मां परेशान है। सहेलियों को जवाब देना होता है जी, मिसेज राजवंशी
के चुन्नू की सेकंड पोजीशन है। और वह स्वाति की मां बतायेगी कि हमेशा की तरह स्वाति तो
फर्स्ट पोजीशन पर ही है जी। हाय रे हाय-98.88 परसेंट सिर्फ, तुझे शर्म नहीं आयी।

बेटी मुझसे पूछ रही है-पापा कितने आते थे आपके।

मारे शर्म के मैं सच नहीं बोलता।

मैं बहुत डर गया हूं। अभी पांचवी क्लास का सिलेबस देख रहा हूं।

मैथ की प्रोजेक्ट फाइल बनेगी। उसमें हरबेरियम की पत्तियां काट कर चिपकानी

क्या पूछा-हरबेरियम का मतलब क्या होता है। मुझे भी नहीं पता।

मुझे लगता है कि भविष्य में लड़के वाले जब लड़की वाले से रिश्ते की बात करने जायेंगे, तो पहली से
पांचवीं तक की सारी किताबें लेकर जायेंगे। और लड़का संभावित पत्नी से पूछेगा-हरबेरियम का मैथ
प्रोजेक्ट करवा पाओगी बच्चों को कि नहीं।

क्या अंडों के छिलकों से खरगोश बनाना नहीं आता, अरे तीसरी क्लास का क्राफ्टवर्क है यह।

क्या माचिस से कुत्ता बनाना नहीं आता, चौथी क्लास का क्राफ्टवर्क है यह तो।

मम्मी नहीं, इस लड़के से शादी करके बहुत परेशानी होगी, इसे तो ग्लेज्ड पेपर पर भुट्टे के दाने से
बिल्ली बनाना नहीं आता, इतना तो आना ही चाहिए ना, बच्चे के पांचवी क्लास के सिलेबस में
होगा ना।

खैरजी बिटिया को मैथ के प्रोजेक्ट में वैरी गुड मिला है। बिटिया को नहीं, उसकी मां और पापा
को मिला है। पूरी रात जागकर बनाया था।

हम पति -पत्नी एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं।

मेरा स्कूल वालों से अनुरोध है कि होमवर्क के लिए एक वर्कशाप मम्मी-पापा के लिए लगा लें। बहुत
शर्म आती है, जब बच्ची पूछती है कि आपको राजस्थानी स्टाइल की पगड़ी बनानी आती है कि
नहीं,हाथी को पहना कर ले जानी है। पापा पहले मम्मी को किसी राजस्थानी मित्र के ले जाते
हैं, मम्मी खुद राजस्थानी पगड़ी बांधना सीखती हैं। हाथी को पहनानी है।

मम्मी कल ग्लेज्ड पेपर पर अरहर की दाल से अफ्रीका का ब्राउन चीता बनाकर ले जाना है।
क्राफ्ट क्लास का एसाइनमेंट है-बिटिया ने स्कूल से आकर घोषित कर दिया है।

बिटिया सो चुकी है। रात के एक बजे मैं तलाश पाया हूं कि अफ्रीका का ब्राउन चीता कैसा होता
है। पत्नी अरहर की दाल बीन चुकी है।

अब चलूं, ग्लेज्ड पेपर पर काम शुरु करना है।

दिल्ली के भिखारी

दिल्ली के भिखारी



दिल्ली में आईटीओ चौराहे पर दिल्ली में एक नौजवान भिखारी भीख मांग रहा था। मैंने कहा- भीख
मांगते हो, अरे कुछ मेहनत किया करो।

भिखारी ने मुझसे पूछा-क्या आपने कभी भीख मांगी है।

मैंने हैरान होकर कहा-नहीं।

फिर आपको क्या पता कि भीख मांगना कितनी मेहनत का काम है-भिखारी ने बताया।

सच्ची में भीख मांगना बहुत मुश्किल काम है, ये पता लग रहा है दिल्ली सरकार चलानेवालों को
देखकर। बार-बार पब्लिक को बताना पड़ता है कि देखो यूपी वाले पानी की भीख नहीं दे रहे हैं,
दे रहे हैं, तो पूरा नहीं दे रहे हैं।

खबर है कि उत्तर प्रदेश सरकार भिखारियों का रिकार्ड तैयार कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार
भिखारियों की गिनती करायेगी। मैं यह सोचकर डर रहा हूं- सारे दिल्ली वाले भी उसमें शामिल
किये जायेंगे क्या।

दिल्ली वाले रोज यूपी सरकार से पानी मांगते हैं और साहब किस अंदाज से मांगते हैं। जैसे उधार
वसूल रहे हों, जैसे पानी की भीख देना उत्तर प्रदेश सरकार का कर्तव्य हो।

बहुत पहले, बहुत पहले मैंने एक हास्टल का भिखारी देखा था। हास्टल शहर से थोड़े दूर बने कालेज
का था। भिखारी हास्टल में लड़कों के कमरे के बाहर फुल जोरदारी से अपना कटोरा बजाता था और
कहता था कि समझ लो, यहां आकर भीख मांग रहा हूं, तुम पर अहसान कर रहा हूं। वरना इत्ती
दूर कौन आता है मांगने। चलो दे दो, तुम भी क्या याद रखोगे, इत्ती दूर आया मैं तुम्हे पुण्य का
मौका देने।

दिल्ली वाले जब पानी मांगते हैं, तो ऐसे ही लगते हैं-यूपी गवर्नमेंट हमको थैंक्यू के साथ पानी दो,
पुण्य का मौका दिया।

ये दिल्ली का कैरेक्टर है, मांगने का भी इस्टाइल है।

अब यूपी वाले पानी दे रहे हैं, जो नेताओं के ईमान से थोड़ा कम गंदा है।

दिल्ली वाले इस पर हाय-हाय कर रहे हैं-हाय गंदा पानी।

वैसे इस मौके का मुहावरा हो सकता है-भीख के पानी की गंदगी नहीं देखी जाती।

पर नहीं, दिल्ली का कैरेक्टर है, दिल्ली की स्टाइल है। दिल्ली वाले दान की बछिया के भी दांत
गिनते हैं।

यूपी वाले इस पर आगे कह रहे हैं-दिल्ली को पानी गंदा ही मिलेगा, क्योंकि दिल्ली वाले यमुना
को इतनी गंदी करके आगे भेजते हैं। दिल्ली में जब यमुना घुसती है, तो साफ होती है, निकलती है,
तो गंदी हो चुकी होती है।

ये भी साहब दिल्ली का कैरेक्टर है, कई नेता, सांसद जब दिल्ली में पहली बार घुसते हैं, तो

साफ होते हैं, जब यहां से निकलते हैं, तो यमुना से भी ज्यादा गंदे हो चुके हैं।

दिल्ली का कैरेक्टर है। दिल्ली की स्टाइल है।

दे दीजिये, अबे दे दे, नहीं देगा, तेरी तो ..................कुछ भिखारीनुमा आवाजें आ रही
हैं।

मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि ये पैसे मांगने वाले भिखारी हैं या यूपी से पानी मांगने वाले
भिखारी।

भाग बालक, भाग बालिका

भाग बालक, भाग बालिका


चालू चैनल के बास लोग चिंतित है। क्या किया जाये।
ना कोई लड़की किसी लड़के के साथ भागी।
बास लोग कह रहे हैं कि अगर लड़के और लड़कियां येसेई शराफत पर उतरे रहे, तो चैनलों का क्या
होगा। क्या दिखाया जायेगा। जिस हिसाब से मारा-मारी हो रही है, उस हिसाब से कुछ समय
बाद तमाम चैनल अपने रिपोर्टरों की ड्यूटी लगायेंगे –बेट्टा फी रिपोर्टर पांच-पाँच लड़के-लड़कियों
को भगाकर शादी कराओ, फिर उन्हे टीवी पर दिखाओ। तब नौकरी चलेगी।
लड़के-लड़की भागते हैं, तो मां-बाप के लिए समस्या पैदा हो जाती है।
लड़के-लड़की नहीं भागते हैं, तो टीवी चैनलों के लिए समस्या पैदा हो जाती है, क्या दिखायें। चैनल
बंद होने का खतरा आ जाता है। नौकरियों पर संकट आ लेता है।
कईयों का रोजगार बच पाये, इसलिए कुछ लड़के और लड़कियों भागना पड़ेगा। उनका कुछ कर्तव्य इस
समाज के प्रति, समाज के रोजगार अवसरों के प्रति बनता है या नहीं।
हे बालिका, हे बालक भाग।
चालू चैनल के बास लोग चिंतित हैं इस बात पर कि लाल हवेली पर काला भूत बहुत दिनों से नहीं आ
रहा है।
भूत कहीं और निकल गया है।
भूत कहीं और निकल जाये, समस्या नहीं है। समस्या यह है कि कंपटीटर चैनल वाले की पकड़ में वो
भूत नहीं आना चाहिए।
पिछले बार आफत हो गयी थी-कंपटीटर चैनल वाले एक एक्सक्लूसिव भूत ले आये थे। जिसके बारे में
बताया गया था कि यह भूत सिर्फ और सिर्फ उसी चैनल पर मौजूद है।
पहले भूत निकलता था, तो लोग डरते थे।
अब भूत ना निकले, तो टीवी चैनल के लोग डरते हैं।
भूत ना निकला, तो रात को क्या दिखायेंगे।
शास्त्रों में लिखा है कि अतृ्प्त इच्छाओँ को पूरा करने के लिए भूत योनि मिलती है।
अब लिखा जा सकता है कि टीवी चैनल वालों की इच्छा पूरी करने के लिए भूत योनि मिलती है।
जल्दी ही चालू चैनल के रिपोर्टरों को बताना पड़ेगा, हर हफ्ते एक नया एक्सक्लूसिव भूत नहीं
पकड़ा, तो भूत बना दिये जाओगे।
वैसे चालू चैनल के रिपोर्टर चर्चा करते हैं, कि मरकर भूत बन जायें तो अच्छा। टीवी चैनलों के
दफ्तर में कम से कम डिमांड तो रहेगी।
दुनिया के सारे भूतों बाहर आओ, प्लीज टीवी पर क्या दिखायेंगे।
चालू चैनल के बास लोग परेशान हैं-बहुत दिन हुए किसी कन्या ने दावा नहीं किया कि वह
इच्छाधारी नागिन है। या किसी नागिन ने दावा नहीं किया कि वह इच्छाधारी इंसान है।
नागिनें समझदार हैं, इंसान होने की इच्छा नहीं करतीं।
नागिनें क्या, पूरा नाग समाज समझदार है, कभी इंसानों को टीवी पर देखने की इच्छा नहीं करता

पर इंसानों को नाग-नागिन चाहिए ही चाहिए।
वो तो इच्छाधारी नाग और नागिनों का अहसान मानना चाहिए तमाम टीवी रिपोर्टरों को कि
इच्छाधारी नाग और नागिन और टीवी चैनलों पर नौकरी मांगने नहीं आते। वो अगर नौकरी मांगने
आने लगे, इंसानी रिपोर्टरों को नौकरी कहां मिलेगी।
मैं चैनल वालों को समझाता हूं –भईया बुश और इराक के मामले पर कुछ रिपोर्ट दिखाओ ना।
चैनल वाला पूछता है-बुश और इराक क्या नाग-नागिन हैं।
मैं डांटता हूं-जनरल नालेज बहुत पुअर है तुम्हारा।
वो बता रहा है –बिलकुल नहीं, नाग-नागिनों कि कितने प्रकार हैं, उसे पता है। बाकी बुश इराक
को पब्लिक देखती नहीं है। बुश को क्या देखें, नाग को ही देख लें। नाग देखने में क्यूट तो लगते हैं,
यह बात बुश के बारे में नहीं कही जा सकती।
मैं समझा रहा हूं कि एकाध रिपोर्ट बढ़ती जनसंख्या पर भी करवा लो।
चैनल वाला कह रहा है-अगर जनसंख्या भूतों की बढ़ रही हो, तो रिपोर्ट करवा लें। इंसानों में
हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है।
आप ही बताइए उसे कैसे समझाया जाये।

ना फहराना मुझको कहे ये तिरंगा

ना फहराना मुझको कहे ये तिरंगा



ना फहराना मुझको कहे ये तिरंगा-2

माँ बाप चबाएँ बेटियों की बोटी
आँसू बहाए हिमालय की चोटी

मैलि हो रही है राम की गंगा
ना फहराना मुझको कहे ये तिरंगा

प्रदूषित है पानी प्रदूषित हवा है
डॉक्टर हैं फ़र्ज़ी नक़ली दवा है
बीमार हो जाए जो होगा चंगा
ना फहराना मुझको कहे ये तिरंगा

अधर्म की आंधी से जूझ रहा है
देखो धरम का दीया बुझ रहा है
जल जाओ इसमे बनके पतंगा
ना फहराना मुझको कहे ये तिरंगा

दे रहे हैं हम ये कैसी शिक्षा
विदेशों मे मांगे नौकरी की भिक्षा
किसान है भूखा बुनकर है नंगा
ना फहराना मुझको कहे ये तिरंगा

ग़ुलामी की बेडी बाँधे जी रहे है लोकतंत्र में भि ज़ुबान सी रहे हैं

जैसे सूंघ गया है कोई भुजन्गा

ना फहराना मुझको कहे ये तिरंगा

कैसी आज़ादी कैसा अभिनंदन
माथे पे सबके ग़ुलामी का चंदन
चारों ओर आशांति नफ़रत और दंगा
ना फहराना मुझको कहे ये तिरंगा

Ganesh ji

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______000000_00000000___00000_0000000000
______________000000_____0000__000000

Sunday, August 12, 2007

ATTENTION internet users !!

Ctrl+C may be the most important work we do everyday. But it's not a very safe thing to do. Read on to know why. What happens when you press Ctrl+C while you are Online...? We do copy various data by Ctrl + C for pasting elsewhere.

This copied data is stored in clipboard and is accessible from the net by a combination of JavaScript’s and ASP.

Just try this:

Copy any text by Ctrl +C


Click the Link: http://www.sourcecodesworld.com/special/clipboard.asp


You will see the text you copied was accessed by this web page.
Do not keep sensitive data (like passwords, credit card numbers, PIN etc.) in the clipboard while surfing the web. It is extremely easy to extract the text stored in the clipboard to steal your sensitive information.

To avoid Clipboard Hack Problem, do the following:

Go to internet options-> security
Press custom level
In the security settings, select disable under Allow paste operations via script.
Now the contents of your clipboard are safe.

Saturday, August 11, 2007

पत्त्यांचा बंगला

पत्त्यांचा बंगला
-------------

खेळाला जाण.
देवाचि आण.
भलताच ताण.

पत्त्यांचा बंगला रचताना,
श्वासांचि वादळे आवरावी लागतात.
त्रिकोणी खोल्या जपताना,
थरथरणारी बोटे सावरावी लागतात.

डोळ्यात प्राण.
सतीचे वाण.
हरपलेले भान.

एक मजला पुर्ण होताच,
मन सोडते सुटकेचा खोल निश्वास.
वरती जाऊन कोसळताच,
पुन्हा एकवार डळमळतोच विश्वास.

गमावली शान.
घुसले बाण.
पुरी दाणादाण.

आशा निराशेचा लाटांवर,
झुलत झुलतच बंगला उभा केला.
थोडा आनंद मानेस्तवर,
हलक्याशा फुंकरीने कोसळुन गेला.

लव्हलेटर

लव्हलेटर

लव्हलेटर लव्हलेटर म्हणजे लव्हलेटर असत
थेट जाऊन बोल्ण्यापेक्षा इजी आणि बेटर असत
गोड गुलाबी थडीतल गोड गुलाबी स्वेटर असत
घुसळ घुसळ घुसळलेल्या मनामधल बटर असत

लव्हलेटर लव्हलेटर म्हणजे एक सॉग असत
ज्यातला मेटर राईट आणि ग्रामर नेहमीच रॉग असत
सुचत नाही तेव्हा तुमच्या हाट्मधल पेन असत
आणि जेव्हा सुचत तेव्हा खिशात पेन नसत
पटल तर पप्पी आणि खटकल तर खेटर असत

लव्हलेटर लव्हलेटर म्हणजे रेअर हबिट असत
वरती वरती लायन आतुन भेदरलेल रबिट असत
शेकी शेकी हातामधुन थरथरणारा वड असत
नुकतच पख फ़ुटलेल क्युट क्युट बड असत
होपफ़ुल डोळ्यामधल ड्राप ड्राप वॉटर असत !

लव्हलेटर लव्हलेटर म्हणजे अग्रिमेट असत
फ़िफ़्टी परसेट सेटल आणि फ़िफ़्टी जजमेट असत
ऑपोनटच्या स्र्टटेजीवर पुढच सगळ डिपेड असत
सगळा आसतो थेट सौदा काहीसुध्दा लेड नसत
हार्ट देऊन हार्ट घ्यायच सरळ साध बार्टर असत !

लव्हलेटर लव्हलेटर म्हणजे एक ड्रीम असत
लाईफ़च्या पेस्ट्रीवरल स्वीट स्वीट क्रिम असत
अर्ध अर्ध प्याव अस शाहाळ्यामधल पाणी असत
तिसर्‍यासाठी नाही अस अगदी प्रायव्हेट मटर असत
दोघापुरतच बाधलेल सत्तर एम एम थिएटर असत

लव्हलेटर लव्हलेटर म्हणजे पहिला सिप असत
चवीसाठी आतुरलेल्या टीनएजरचा लिप असत
फ़ेसाळलेल्या नशिबासाठी हवाहवासा ग्लास असत
आऊट होतील त्याच्यासाठी दुसर्‍या दिवशी टास असत
जेपेल त्यानेच घ्यावी अस "विदाऊट पाणी क्वार्टर" असत!!!!

वापरा जरा आम्हाला समजेल अशी भाषा.

वापरा जरा आम्हाला समजेल अशी भाषा.
----------------------------------------

श्वास घ्यायला सुद्धा लागतोय इथं पैसा
कसे करणार कर्म सोडुन फळाचि आशा ?
नुसते पोकळ शब्द, बुडतील का मनात ?
वापरा जरा आम्हाला समजेल अशी भाषा.

भरल्या पोटी ढेकर देत,
मिताहारावर बोलताय ?
सत्त्याग्रहातले मीठ,
जखमेवर चोळताय ?

दांडी आता उडाली, सत्त्याने गुंडाळलाय गाशा.
वापरा जरा आम्हाला समजेल अशी भाषा.

पैशाच्या पुंगीमुळेच तर,
नाग गुंगुन डोलतायत.
सोनेरी पिंजर्यातले पोपट,
तत्वज्ञान बोलतायत !

चुकली आहे कुणाला, धनाचि अभिलाषा ?
वापरा जरा आम्हाला समजेल अशी भाषा.

भंकस डोस पाजण्यापेक्षा,
पोटाला काही घाला.
भाकड विचारांच्या दांडुने,
बडवावं कशाला ढोलाला ?

भेगाळलेल्या कातडीचा, नका बनऊ ताशा.
वापरा जरा आम्हाला समजेल अशी भाषा.

नश्वरतेचे सत्य समजुन,
काय होणार फायदा ?
नको आम्हाला तुमचा,
मुक्ती-बिक्तीचा वायदा.

पोटात मेल्या कावळ्यांवर, घोंगावताहेत माशा
वापरा जरा आम्हाला समजेल अशी भाषा

'दाम करी काम' हे,
यमक किती जुळतंय !
दुसरं काही जुळवलं तरी,
कानाला सालं खटकतंय !

किर्तनाचे दिवस गेले, उरलाय फक्त तमाशा
वापरा जरा आम्हाला समजेल अशी भाषा

Marathi Kavita सांगा,उशीर होतोय का???

सांगा,उशीर होतोय का???

ती माझ्याकडे बघते
मी तिच्याकडे बघतो
पण बोलणे होतच नाहि
बोलायला उशीर होतोय का?

काल सुद्धा तिने खूप वेळा पाहिले
माझेच लक्षच नव्हते
म्हणून मला नाहि कळले
बघायला सुद्धा आता उशीर होतोय का?

माझी नजर गर्दीतून तिलाच शोधत असते
तिची नजर देखिल कोप-यात वाट पहात असते
नजर मिळाल्यानंतर ती गोड हसते
मला हसायला उशीर होतोय का?

ती का बोलायला येत नाहि
याचा विचार मी करतो
आणि समोर आली कि मला सगळ्याचाच विसर पडतो
माझ्या विचरण्याला उशीर होतोय का?

दिवसामागून दिवस जात आहेत
आमचे नुसते असेच चालू आहे
कधी कोणी तरि पुढे येणार का?
अजून होणारा उशीर थांबवणार का??

आता सुद्धा मला उशीर होतोय
इतके दिवस तिला पहातोय
तिच्या सौंदर्याला शब्दात ऊतरवायला
उशीर होतोय का?
सांगा,उशीर होतोय का??????

राजे

राजे

मोघलान्नी हिन्दुन्ना
केल होते गुलाम
आपल्या प्रत्येक श्वाशाचा
हाति त्यान्च्या होता लगाम

हिन्दुन्ना नव्हती अब्रु
नव्हता त्यान्ना मान
स्त्रियान्ची नव्हती कदर
लान्घयचे होते पारतन्त्राचे रान

अशातच तुतारीन्च्या आवाजने
अवघे शिवनेरी दुमदुमले
सन १६२६ अक्शय्यत्रुतियेला
राजे प्रुथ्वीवर अवतरले

राजान्ना होती पुर्ण
परिस्थितिची जाण
सशपथ राज्याभिशेक
करुन झाले मराठ्यान्ची शान

गनिमी कावा हेच
त्यान्चे परिपुर्ण अस्त्र
विश्वासाने सन्घटित मावळे
हेच त्यान्चे अस्त्र

शाहिस्तेखानाची कापली बोटे
अफ़झलखानाचा केला अन्त
मोघलशाहिला पुर्ण हलविले
पराक्रम त्यान्चे अनन्त

राजे तुम्ही होता म्हणूनच
आज आहेत मन्दिरान्चे कळस
गळ्यात डोलते मन्गळ्सूत्र
अन्गनी शोभते तुळस

राजे तुम्ही होता म्हणूनच
आज आहे कुन्कु कपाळी
आशीर्वाद आहेत
प्रसन्न आहे माती काळी

राजे तुम्ही होता म्हणूनच
कमरेला आहे करदोरा
हिन्दु आहेत जगाच्या पुढे
चालतोय त्यान्चाच तोरा

राजे तुम्ही होता म्हणूनच
आज आम्ही आहोत
आमचे शत:कोटी प्रणाम
तुमच्या चरणी जावोत

from one of my friends scrap book !!

Friday, August 10, 2007

इंटरनेट के फ़िशिंग हमलों से कैसे बचें?

इंटरनेट के फ़िशिंग हमलों से कैसे बचें?


पिछले हफ़्ते मुम्बई पुलिस ने कुछ नाइजीरियाई नागरिकों को इंटरनेट पर चार-सौ-बीसी और धोखाधड़ी करने के आरोप में पकड़ा. उन पर आरोप था कि उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक की एक नकली साइट तैयार कर बैंक व ग्राहकों को करोड़ों रुपयों का चूना लगाया. उन्होंने बैंक के ग्राहकों को नकली ईमेल भेजकर कहा था कि कुछ कारणों से वे अपने पास-वर्ड और उपयोक्ता नाम अपडेट करें. ईमेल में कड़ी उस नकली साइट की थी जो हूबहू आईसीआईसीआई बैंक की असली साइट जैसा दिखता था. ग्राहक झांसे में आकर अपनी गोपनीय जानकारियाँ वहाँ डाल देते थे. अपराधियों ने यह जानकारी हासिल कर असली बैंक खातों से करोड़ों रुपए निकाल लिए और इंटरनेट बैंकिंग के ग्राहकों व सेवा प्रदाताओं को करोड़ों रुपयों का चूना लगाया. इस तरह की धोखा-धड़ी, जिसमें नकली साइट बना कर उपभोक्ताओं को ठगा जाता है, फिशिंग कहलाता है.


अपना शिकार फांसने के लिए अपराधी नकली साइटें इस तरह बनाते हैं कि वे पूरी असली लगें. एक सामान्य उपयोक्ता के लिए नकली और असली साइट में भेद करना मुश्किल होता है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर इंटरनेट ब्राउज़रों के नए संस्करणों में एंटी फ़िशिंग (फ़िशिंग के संभावित हमलों से बचाने के लिए चेतावनी) वार्निंग विशेषताएँ अंतर्निर्मित शामिल की जा रही हैं. ऑपेरा 9.01, फ़ॉयरफ़ॉक्स 2 तथा इंटरनेट एक्सप्लोरर 7 संस्करणों में आपको इस तरह की सुविधा मिलती है. जब आप इस सुविधा को सक्रिय करते हैं तो ये ब्राउज़र विविध भरोसेमंद स्रोतों से प्राप्त डाटाबेस को जाँच कर यह तय करते हैं कि जिस साइट की कड़ी को खोलने के लिए आपने क्लिक किया है वह सही है या नहीं. अगर कड़ी उनके पास उपलब्ध धोखाधड़ी की साइटों वाले डाटाबेस से मिलान करती है तो वे आपको चेतावनी संदेश देते हैं कि जिस साइट पर आप भ्रमण करना चाहते हैं वह धोखाधड़ी के उद्देश्य से तैयार की गई है, अतः वहाँ न जाएँ.


संभावित फ़िशिंग हमलों से बचने के लिए ऐसे संदेशों को गंभीरता से लें व उन्हें अनदेखा न करें.

Passport information of anyone easily available

Hi,


Please go & check out this site!!! I was rather shocked to find a
website
that holds everyone's passport details along with photograph. Anyone
can
access other people's personal info. Which is of course a major worry
in
terms of identity fraud etc? I suggest you remove your info. Act as soon as possible. And please forward this important info
to
family and friends....... The website address is

http://www.humnri.com/enter/passport

Also if u don't have passport plz go and check becoz some one may have
got issued passport based on ur details i.e. u must verify even if u
don't have one and take app action rather
than getting in trouble later.
Take action as early as possible

Computer Vs. Hindi Films :-

Computer Vs. Hindi Films :-

1) Pentium III & Pentium I ---- Bade miyan - Chhote miyan.

2) Computer infected by Virus - Pyar to Hona hitha.

3) Hard disk and Floppy disk - Gharwaali Baharwaali.

4)F1 - Guide.

5) Esc - Nau Do Gyarah.

6) Ctrl+Alt+Del - AkhriRastaa.

7) CrtlC + CtrlV - Duplicate.

8) Undo - Aa ab lautchale.

9) Super User Password - Gupt.

10) BackUp - Jaagteraho.

11) UPS - Janta Hawaldar.

12) Server -Godfather.\ SARKAR...

13) Proxy Server - Padosan.

14) Security -Nakabandi.

15) Storage - Tehkhana.

16) Storage capacity -Badhti ka naam Dadhi.

17) Computer without RAM - KoraKagaz.

18) Computer whose OS is DOS - Buddha mil gaya.

19)System which frequently requires bootable disk - Sharabi.

20) DumbTerminal - Anari.

21) Mouse - Jaanwar.

22) Hard Disk partition- Batwara.

23) Hardware & Software - Ek duje ke liye.

24)Tempo rary file - Khote Sikkey.

25) Operator vs Computer - Mein khiladi Tu Anadi Reply

Marathi Kavita नवं नवं प्रेम व्हतं

नवं नवं प्रेम व्हतं

तीचं मायं एकदम सेम व्हतं
अन् खान्या-पिन्या घुमन्याच्या मामल्यात
खिशाले काही नेम नव्हतं ।
कधी म्हने सिनेमा,कधी म्हने बगिचा
अन् माया पैशावर तीची अशी चालली होती मजा ।
माई नजर फसलि , मले ते गाय वाटलि
पन गाय् कुठं, ते त म्हैस निघलि,
मले सोडुन ते दुसर्या संग गेलि
सांगतो सगळी हकिकत काय झाली॥
एक दिवस मग वॅलेंटाईन आलं
मीनं तीले एक फुल देल्ल
तीनहि ते ठेवलं
माया मनात त मंग कस-कसच झालं
मीनं आय लव यू म्हनाच्या पयलेच
ति म्हनलि थँकू
तसबि मले एक फूल पायजे व्ह्तं
माया नव्या बॉय फ्रेन्ड ले मले ते द्याचं व्हतं
माया समोरच तीनं त्याले बोलावलं
एक हात हातात घेवून दुसर्या हातात फूल् देल्ल ॥
मायं मन असा जळवून गेला
अन् तो हल्या,
माया म्हशिले माया समोरुन घेवून गेला ॥
असं मायं मन तोडून् गेलि
मायं फूल् त्याले देवून,
मले फूल् बनवुन गेली ॥
तवाच मले दूसरी दिसली,
तीच्या नजरेत नजर ठसली
आता,नवं नवं प्रेम आहे
अन् काय सांगू राजेहो
माया मनत त कस-कसच होत आहे,
कस-कसच होत आहे ॥

Computer Vs. Hindi Films :-

Computer Vs. Hindi Films :-

1) Pentium III & Pentium I ---- Bade miyan - Chhote miyan.

2) Computer infected by Virus - Pyar to Hona hitha.

3) Hard disk and Floppy disk - Gharwaali Baharwaali.

4)F1 - Guide.

5) Esc - Nau Do Gyarah.

6) Ctrl+Alt+Del - AkhriRastaa.

7) CrtlC + CtrlV - Duplicate.

8) Undo - Aa ab lautchale.

9) Super User Password - Gupt.

10) BackUp - Jaagteraho.

11) UPS - Janta Hawaldar.

12) Server -Godfather.\ SARKAR...

13) Proxy Server - Padosan.

14) Security -Nakabandi.

15) Storage - Tehkhana.

16) Storage capacity -Badhti ka naam Dadhi.

17) Computer without RAM - KoraKagaz.

18) Computer whose OS is DOS - Buddha mil gaya.

19)System which frequently requires bootable disk - Sharabi.

20) DumbTerminal - Anari.

21) Mouse - Jaanwar.

22) Hard Disk partition- Batwara.

23) Hardware & Software - Ek duje ke liye.

24)Tempo rary file - Khote Sikkey.

25) Operator vs Computer - Mein khiladi Tu Anadi Reply

Hindi kavita किसी बहाने से . . .

किसी बहाने से . . .

किसी बहाने से तेरा मेरे पास आना
ना केहना कूछ और बस एक झलक ले जाना


किसी बहाने से मुझको फिर छू लेना
और मेरे पलट जाने पर झट से दूर हो जाना

किसी बहाने से मुझको बेवजह सताना
और मेरे रुठ ने पर और हसके चिड़ाना

किसी बहाने से मेरी आँखो मे झाकना
और गीली होने पर झट से कही और झाकना

किसी बहाने से मेरे दिल को पढ़ने की कोशिश करना
और ना पढ़ने पर मुझसे एक लंबी दूरी का एहसास होना

किसी बहाने से तुम्हारा मुझको छोड़ के जाना
और मेरे रोकने के बाद जल्दी वापस आने का वादा करके
फिर वापस ना आना . . . .

Hindi kavita अच्छा लगता है तेरे साथ

अच्छा लगता है तेरे साथ


अच्छा लगता है तेरे साथ
गुमसूम गुमसूम एक प्यारा एहसास

सारी सारी रात नीले आसमा तले
एक टक तारो को देखना
बिना एक बोल बोले
सीने पर सर रखे
अच्छा लगता है तेरे साथ

सर्द राते सुनी सड़क पे
ख़ामोशी ओढ़े चलते रेहाना
एक दूजे का हाथ थामे
अपनी ही दुनिया मे खोए
अच्छा लगता है तेरे साथ

गर्म राते सागर के किनारे
मुस्काते एक दूजे मे खोए
लहारो से एक दूजे को भीगाते
तेरी बाहो मे आँखे बंद करना
अच्छा लगता है तेरे साथ

नर्म ठंडी बर्फ़ के गोले बनाना
तुम पे फ़ेकना और तुम्हारा नाराझ होना
मेरे गालो पे ठंडी बर्फ़ लगाना
अच्छा लगता है तेरे साथ

भीगी भीगी रिमझिम मे
एक ही छाते को ओढ़ना
कभी मेरा तो कभी तुम्हारा भिगाना
और ना जाने क्या क्या केहना
अच्छा लगता है तेरे साथ

Hindi kavita सपनो का सौदागर...

सपनो का सौदागर..........

आओ भई आओ
सपने ले लो
दिल्ली है ये
बाज़ार का दूसरा नाम
फ़र्क इतना है
यहाँ चीज़ें नही
सपने बिकते है .
हैर किस्म के सपने.


क्या हुआ ?
कोई सपना ही नही देखा ?
कोई बात नही अभी लो
सपनो की पोतली खोलता हू
ये देखो धनवाँ
ये डेलखो नौकरी
ये लो डिग्री

क्या कहा?
डिग्री दिखौन?
ये लो बाबू
हैर किस्म की डेग्री

(दो मिनट बाद )

हममममम्म्म........
तो ऐसा कहो ना
की टॉप की डेग्री चाहिए...
ये लो जान संचार की (mass communication)
सबसे ज़्यादा बिक रही है बाबू
पत्रकार बानो
PR बनो
ad बनाओ
ये लो..........

ओह...
अच्छा तो गारंटी चाहिए जॉब की ?
हा हा हा ....
भई मैं ही उदाहरण हू
मैं भी जन संचार में स्नातक हू
तभी तो इतनी सफलता से यहाँ
फ़ुटपाथ पर
सपने बेच रहा हू
रंग बिरंगे सपने.

आरेय नही चाहिए था तो पहले बोलते
हटो अब
बोहनी का टाइम है

आओ भई सपने ले लो.......
रन बिर्ँगे..........

Hindi kavita रिश्तो के मायने

रिश्तो के मायने



समय के साथ रिश्तो के मायने बदल जाते हैं
कल तक जिन के कंधों पर चढ़कर
घूमा करते थे हम
वहीं आज हमारे कंधे
उनके काँपते हाथों का सहारा हैं
उन्ही हाथों का
जिन्होने हमे जन्म से संभाला
चलना सिखाया
गिरने पर उठाया
प्यार से सहलया
चपत लगा एक प्यार भारी
सही ग़लत में फ़र्क सिखाया.

ये क्या है आख़िर ?
प्रकृति का नियम
या रिश्तो के बदलते मायने ?

आओ इसके लिए वक़्त को ज़िम्मेदार कहें



आओ इसके लिए वक़्त को ज़िम्मेदार कहें
आओ इसके लिए वक़्त को ज़िम्मेदार कहें
एक वक़्त था
जब हम
साथ रहते थे हमेशा
घर में स्कूल में
मैदान की धूल में

लेकिन आज छह कर भी मिल नही पाते
ना जाने तुम कहाँ हो
पर मुझे ख़ुद की भी तो ख़बर नही
ना जाने क्या हुआ है
ख़ुद को खो चुका हू
ऐसे में कैसे ढूँढु तुम्हे
कहाँ ढूँढूं तुम्हे ?
सोचता था पहले की तुम बदल गये हो
या फिर मैं ख़ुद बदल गया हू
लेकिन
आज दफ़्तर से आक्र एहसास हुआ
कि ग़लती हमारी नही
जीने के लिए पैसा चाहिए
दोस्ती और भावनाएँ नही
और इस चाह में सभी बंधे हैं
आप भी और मैं भी
दोष हमारा नही है
आओ इसके लिए वक़्त को ज़िम्मेदार कहें
शायद वक़्त ही बदल गया है

Hindi kavita लाश

लाश

कठघरे में खडी एक लाश
सेंक्ड़ौ सवालो की बोछार
क्यों, अपने ही सीनदुर का
कीया बेदरदी से खून..........................

लाश जोरो से हंसी,
चारो ओर सनाटा छाया
इक सांस में वो जो बोली
सुनीये आप भी उसके अलफाज़.....................

अठर्हा साल की थी जब
बीन पूछे थमायी गयी
इक अजनबी के हाथ डोर
शायाद ये इक रस्म रीवाज़

पुरे बारह साल उसके आंगन
कठपुतली की तरह नाचती रही
बदले में मीलता तीरसकार
ओर दीन की दो सूखी रोटी

माना की मैं घर के बहु
जीसका ना अपना कोई असतीतव
पर इक अपना वजूद तों है
मंजूर नही था की जीन्दा जलु

हाँ उठ्या मैंने इक बेदर्द कदम
अपने अत्याचारो का लीया बदला
जो मुझे जलाना चाहता था, उसे मैंने ही
उठा दीया इस दुनीया से

हाँ मानती हूँ अब ये बात
सडी बरसो पुरानी मैं े इक लाश
इक बार फिर मुझे मार दो
अब परवाह नही चाहे ज़ीन्दा जला दो..........................

HIndi kavita क्यों कोई मीलता है

क्यों कोई मीलता है


क्यों कोई मीलता है

क्यों कोई मीलता है
जब उसे जाना ही होता है

आता है तों ना जाने
कीत्ने रंग भरता है

सपनो का घरोंदा बना
तीत्लीयो से रंग बीखेर्ता है

एक अजीब सा सुकून
चारो ओर रहता है

महकते फूलो की खुशबू
दामन मे खीला जाता है

चांदनी रातो की चमक ला
ज़ींदगी में नया नूर लाता है

फीर क्यों चला जाता है
वो यूं तनहा छोड़......................

Hindi Kavita "अंधे की कामना"

मुझको दृष्टि नही चाहिए "अंधे की कामना"

"अगर मेरी भी आँखें होती
देख पाता मैं दुनिया के रंग ,
भागता बाग़ बाग़ीचो में
रहता 'कथित' भूलो के संग"

"कभी दौड़ता इस पथ पर
कभी उस पथ पर चल पाता,
कभी तैरता शैतान नदी में
तो कभी पहाड़ी पर चढ़ जाता"

"बहुत कुछ सुन रखा है मैने
कि दुनिया अपनी अच्छी है
पर शक होता है मुझको फिर
कि बातें ये कितनी सच्ची हैं !!!"

"जब देखता हू कानो से
इस दुनिया का असली रंग,
सोच पड़ी बीमार सभी की
और है मारी पड़ी उमंग"

"अन्न के लिए लाल बिक रहे
बेटी का सौदा बाप कर रहा,
धर्म-पुण्य के नाम पर आदमी
क़दम-क़दम पर पाप कर रहा"


"एक दुआ मेरी ईश्वर से
मुझको सृष्टि सही चाहिए,
हो ना पाए गर ऐसा तो
मुझको दृष्टि नही चाहिए"

Marathi kavita : हल्ली नाही कोणी बोलायला

हल्ली नाही कोणी बोलायला





ऑफिस मध्ये आल्यावरही
काम काही सूचत नाही
पण नुस्ताच पगार घेणे?
छे! छे! तेही मनाला रुचत नाही

म्हणून मी काही असाच
खुर्चीवर बसून रहात नाही
एक दोन कागद शोधून
करतोच एखादी तरी सही
आणि राहीली एखादी फाईल तरी
काम काही फार अडत नाही

हे मात्र खरं आहे हल्ली काम उकरुन पण
फार काही सापडत नाही
येणाऱ्या जाणऱ्यांना पकडून
मारतो गप्पा काहीच्या बाही
गप्पाही आता साऱ्या सरत आल्या
हल्ली नाही कोणी बोलायलाही

घरी गेल्यावर शॉवर घेउनही
मनाची तगमग काही कमी होत नाही
सायंकाळी वाईन ची बाटली
खुणावल्याशिवाय रहात नाही
मस्त दोन ग्लास झाल्यावर

काव्य पण लांब रहात नाही
लिहून असल्या या भिकार कविता
orkut वर सुद्धा मी
लोकांना सोडत नाही

Marathi kavita जस्स च्या तस्स......

जस्स च्या तस्स.............!!!!!!!



जस्स च्या तस्स.............!!!!!!!
जस्स च्या तस्स.............!!!!!!!

जस्स च्या तस्स राहील का सारं....?

हाक नुसती ऐकून थांबेल का वारं.......??

धपाट्याबरोबर मिळतील का आईच्या हातचे पोहे

रीझल्टवरच्या सहीसह बाबांचा प्रश्न ....काय हे?

सहलीच्या आदल्या दिवशी उडालेली झोप,

आजीबरोबर लावलेले पहिले-वहिले रोप,



ती दिड रुपया भाड्याची सायकल,

ब्रेकडांस व मूनवॉक करनारा तो मायकल...

पुन्हा खांद्यावर दिसेल का ती शाळेची बॅग....?

अणि मानेला रुतेल का नव्या शर्टचा टॅग....?



आवडती छ्त्री हरवेल का परत..?

मोडतील का बेत आल्यावर ठरत..?

शाळेतली मैत्रीण परत मारेल का हाक..?

मिळेल का कधी खिडकीजवळचा बाक...?



ऐन सुट्टीत हरवेल का पत्त्यांचा कॅट..?

आउट झालो कारण चांगली नव्हती बॅट..?

होईल का टिव्ही - "ब्लॅक ऍन्ड व्हाईट" चा "कलर"..?

पाहिल्यावर एकदम चोरेल का ती नजर...??



"Ice-cream" ची टिंग-टिंग ऐकून पळतील का पोरं...?

मधल्या सुट्टीत खायला मिळतील का बोरं..?



जस्स च्या तस्स राहील का सारं....?

हाक नुसती ऐकून थांबेल का वारं..?

Marathi kavita मलाही girl friend मिळावी

मलाही girl friend मिळावी


सुंदर मुलीशी ऒळख व्हावी,
आम्हा दोघांची मने जुळावी ।
हातात हात घालून फ़िरणारी,
मलाही girl friend मिळावी ॥

हास्याच्या पहिल्या किरणाने,
प्रितीची खळी उमलावी ।
डोळ्यात जिच्या ऐश्वर्य असावे,
रूपाची ती राणी असावी ॥
अशीच माझी स्वप्नसुंदरी,
ह्र्दयाच्या नगरात रुळावी ।
हातात हात घालून फ़िरणारी,
मलाही girl friend मिळावी ॥

चौपाटीवर पाणीपूरीतून,
प्रणयाचेच घास भरवू ।
रिक्षात मीटरला साक्षी मानून,
प्रेमाच्याच शपथा घेऊ ॥
आयुष्यातील सारी दु:खं,
जिच्या सहवासात टळावी ।
हातात हात घालून फ़िरणारी,
मलाही girl friend मिळावी ॥

द्वीधा मनं मग मध्येचं म्हणत,
आधी girl की आधी friend ।
आयुष्यभराचं नातं हवं,
का हवा one night stand ॥
देव करो तीच्याकडूनचं,
प्रेमाची ख्ररी व्याख्या कळावी ।
हातात हात घालून फ़िरणारी,
मलाही girl friend मिळावी

Marathi jokes

एक गाढव झाडावर चढते. झाडावर आधीपासुनच हत्ती बसलेला असतो.
हत्ती-तु झाडावर कय करतोयस?
गाढव- सपरचन्द खायला आलोय.
हत्ती- आरे गढवा हे तर आंब्याचे झाड आहे.
गाढव- मी सफरचन्द सोबत घेउन आलोय

भिकारी


भिकारी- बाइ साहेब आज मला भीकेंत लाडु घाला.
बाइ साहेब - का रे बाबा?
भिकारी- आज माझा वाढ दीवस आहे..


विसरभोळे....

प्रोफेसर विसरभोळ्यांचा म्रुत्यु झाला. अंतयात्रेस बरेच लोक व त्यांच्या विद्यापिठांतले सहकारी व विद्यार्थी जमले होते. कसे काय गेले.. एकान विचारल..बहुतेक श्वास घ्यायला विसरले आसतिल..एक विद्यार्थी उदगारला...

शस्त्र क्रीया....
.
ओप्रेशन टेबल वरचा पेशंट खुप घाबरत होता...
घाबरला काय? डोक्टरन विचारल..
हो. ना.. पहिलीच वेळ आहे... तो म्हणाला..
घाबरू नकोस.. माझी पण पहीली वेळ आहे....डोक्टर म्हणाले

मुल-मुली...

द्त्तो वामन पोतदार पुणें विद्यापीठांचे कुलगुरु असताना दिक्षांत समारंभात भाषण करताना म्हणाले...
'मेरीट लिस्ट बघीतल्यावर अस दिसतय कि या वेळी मेरीट मघे येणा~या मुलींचि संख्या मुलांपेक्षा खुपच जास्त आहे.म्हणजेच मुली मुलांपेक्षा खुप हुषार आहेत..अस म्ह्टल्यावर उपस्थीत मुलींनी टाळ्यांचा कडकडाट केला..द्त्तो वामन पुढें म्हणाले..पण मुलांनी नाराज व्हायच कारण नाही.. कारण या हुशार मुली शेवटी तुम्हालाच मिळणार आहेत.. या वर सर्वांनीच टाळ्यांचा कडकडाट केला...

मीत्र..

दोन मीत्र कायम एक मेकावर कुरघोड्या करत आसायचें.
कालांतरांने एका मित्रांची परीस्थिति फ़ार बिघड्ली खायचे वांदे झाले.
पैसे कमी असल्यान तो एका अतिशय थर्ड रेट होटेल मधें जेवयला गेला.
अन समोर पहातो तो काय त्याचा मित्रच वेटर म्हणुन उभा होता.
:मित्रा तु,अन इतक्या थर्ड रेट होटेल मधें काम करतो, अन ते पण वेटरचे?.. अरेरे :
;हो पण मी इतक्या थर्ड रेट होटेल मधें जेवत नाही..; मित्र शांतपणे. म्हणाला...

भाव..

आचार्य अत्रे सांगत होते..मराठी भाषा फार मजेदार.. शब्द बदलला की भाव बदलतो.उदा..
एक माणुस रस्त्यावरुन चालला होता. वरच्या मजल्या वरुन डोक्यावर वीट पडली अन डोक फुटल..करुण रस.

एक माणुस रस्त्यावरुन चालला होता. वरच्या मजल्या वरुन डोक्यावर वीट पडली अन वीट फुटली..हास्य रस...


लग्न..


बाबा लग्नाला किती खर्च येतो..?
सांगता येत नाही.. माझा अजुनही चालु आहे..

दारु..


दारुडा आपल्या दारुड्या मीत्राला बार मधे..
काय दोस्ता फ़ार टेन्शन मधे दिसतोय..दोस्तान विचारल.
[घुट्का घेत} काय सांगु यार..जानेवरी मधे आइ वारली..जाताना माझ्या साठी १ लाख रु. ठेवुन गेली..तो म्हणाला
अरेरे..दोस्त म्हणाला
फ़ेब्रुवारीत बाबा गेले...जाताना माझ्या साठी २लाख रु. ठेवुन गेले..तो म्हणाला
अरेरे.. दोन महीन्यात दोघे गेले.. फ़ार वाइट झाल..दोस्त म्हणाला
गेल्या महीन्यात आत्या गेली.. ति ७०००० हजार ठेवुन गेली..
अरेरे..जवळ्ची माणस गेली.. ३ महीन्यात..फ़ार वाईट झाल..दोस्त म्हणाला
अन ह्या महीन्यांत.. अजीबात कुणीच नाही रे..तो रडत रडत म्हणाला

ज्योतिशी..

रु ५००० हजारात.कोणतेही ३ प्रश्ण वीचारा.ज्योतिशी जाहिरात करत होता...
एका माणसान विचारल... ३ प्रश्णांना ५००० रुपये म्हणजे जरा त्यास्त होतात नाही?
मान्य आहे.. पुढचा प्रश्ण विचारा..ज्योतिशी म्हणाला....

पेन्सील..


डोक्टर.. माझ्या मुलांन पेन गिळल आहे. काय करु...फोन वरुन बाबा विचारत होते..
काळजी करु नका..मी येई पर्यंत पेन्सिल वापरा.. डोक्टर म्हणाले..


मराठी विनोद..

तो- अरे माझा कुत्रा हरवला आहे, मी अप सेट आहे.
हा- एवढच ना मग तशी जाहीरात दे ना पेपरात..
तो- अरे पण कुत्र्याला वाचता येत नाही ना..
=======================================================

बाबुराव अत्यंत तीरसट होते.ते एकदा बस मधें बसले.कंडक्टर आल्यावर म्हणाले एक स्टेशनच तीकीट द्या. आहो पण बस जिमखान्यावर जाते.कंडक्टर म्हणाला..मग मला काय सांगतोस ते त्या ड्रायव्हरला सांग..बाबुराव तीरसट पणें कंडक्टरला म्हणालें........
==================================================

मुलगा- बाई साहेब मी अंधळा मुलगा आहें मला मदत करा.
बाई साहेबांना दया येते अन त्या त्याला १० रु. देतात. अन कुतुहलाने विचारतात.
काय रे ह्या पैशांचे काय करणार?
काय नाय.. मुलगा उत्तरला..मी अन माझें ४-५ आंधळे मीत्र रात्री सिनेंमा बघायला जाणार आहे


पुर्विचे पुरुष होते बाइलवेडे...
अन आताचे पुरुष मोबाइलवेडे..

************************************************************************

बंडु ५ विषयांत नापास झाला होता.या वेळी प्रगती पुस्तक वडीलांना दाखव व त्यांची सही आण व ते काय म्हणाले ते सांग अशी शिक्षकांनी त्याला तंबी दीली.
दुस~या दिवशी बंडुन प्रगती पुस्तक शिक्षकांना दिले.
काय म्हणालें तुझें वडील? त्यांनी विचारल..
ते म्हणाले माझ्या पेक्षा चांगली प्रगती आहे, तुझ्या वयांचा असताना मी ७ विषयांत नापास झालो होता.

************************************************************************
चिंटुन दंगा केला म्हणुन त्याला बाकांवर उभा केला होता. तरीहि त्याचा दंगा चालुच होता.
चिंटु बडबड बंद कर अन गपचुप बस गुरुजी ओरड्ले.
त्यान बडबड बंद केली व बाकांवर बसला.
बाकावर का बसला? उभा रहा गुरुजी ओरड्ले
पण सर तुम्हीच म्हणाला ना की गपचुप बस म्हणुन मी बसलो....
==========================================
मुलांनो आज आम़च्या घ्ररांव्ररुन हत्तींची मीरवणुक गेली.
चिंटु- मग सर तुमच घर पडल असेल नांही.?
======================================

सुरेश - अरे रमेश, तू हुशार आहेस ना, मग माझ्या एका प्रश्‍नाचं उत्तर दे.
रमेश - हो, विचार ना.
सुरेश - राजकारणी म्हणजे कोण? त्याची व्याख्या काय?
रमेश - किती सोपा प्रश्‍न आहे. अरे जो उत्तम पूल बांधून देण्याचं आश्‍वासन देतो, ज्या ठिकाणी नदीचा मुळीच पत्ता नसतो.
======================================
एकदा एका हत्तीचं एका
डासिणीवर (म्हणजे डासाची मादी)
प्रेम जडलं. खूप दिवस दोघांचं
अफेअर जोरात चाललं. सगळ्या
जंगलात या प्रकरणाची चर्चा
गाजत राहिली. अखेर हत्तीनं
डासिणीच्या वडिलांना भेटून
तिला रीतसर मागणी घातली. पण,
तिच्या घरच्यांनी लग्नाला
प्रचंड विरोध दर्शवला.... का?....

....

सांगा सांगा का?

अहो, ते म्हणाले, ''बाकी ठीक
आहे, मुलाचे दात फार पुढे
आहेत!''

तरीही, घरच्यांच्या
विरोधाला न जुमानता दोघांनी लग्न
केलं. पण, लग्नाच्या पहिल्या
रात्रीच डासिणीचा मृत्यू
झाला...

... का?...

...

...

...

...

विचार करा...

...

...

...

अहो, भलतेसलते विचार करू नका!
हत्तीला रात्री 'गुडनाइट'
लावून झोपायची सवय होती!!!!

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भारताचे पोलिस
एकदा अमेरीका, चीन आणि भारत ह्या तीन देशाच्या पोलिसांमध्ये शर्यत लागली, की जंगलामध्ये सर्वात प्रथम अस्वलाला कोण पकडत?

प्रथम चीन देशाचे पोलिस जंगला गेले त्यांनी अस्वलाला दोन तासात पकडल.

नंतर अमेरीक पोलिस जंगलात गेले त्यांनी दिड तासात अस्वलाला पकडुन आणल.

शेवटी भारताचे पोलिस जंगलात अस्वल पकडण्यासाठी गेले. ते अर्ध्यातासात परत आले. त्यांनी एका माकडाला पकडुन सर्वांनसमोर हजर केले. सर्वांना आश्चर्य वाटले की ह्यांना अस्वल पकडायला पाठवले आणि हे माकड पकडुन घेऊन आले?

तेवढ्यात एका भारतीय पोलिसाने त्या माकड्याच्या कंबर्ड्यात लाथ घातली. तसे ते माकड ओरडु लागल, "हो मीच ते अस्वल".

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कणेकरांच्या एका पुस्तकात वाचलेला हिंदी संवाद
नुकतेच कणेकरांच्या एका पुस्तकात वाचलेला हिंदी संवाद

`घर मै माजी है|`
`यहां माजी कोइ नही, बहेनजी हई` पत्नीचे फणकार्यात उत्तर.
`बहेनजी, आप साबुन कौनसा इस्तेमाल करती हो?`
`मेरेकू ईंपोर्टेड पिअर्स पसंद है, लेकिन परवडता किसको है? ये कवडीचुंबक का घर है`
`तो आपका परिवार कौनसा साबुन इस्तेमाल करता है?`
`परीवार तो घरके मालिक जैसाही बेशरम है. तीन दिन से मै घसा खरवडके चिल्ला रही हुं के साबुन संपा है, लेकिन किसीको ढीम्म नही है. महागलीच्छ परीवार है. मेरे माहेरकू हर आदमी का वेगळा वेगळा साबुन था. एक दिन चुकीसे मेरी माँने टायगर का साबुन लिया तो भडक के मेरे पिताने पूरी साबुनकी वडी गिळी थी. उससे उनका आतडा स्वच्छ हुआ. इतने स्वच्छ परिवारसे मै इस गलिच्छ परिवार मे आ गयी क्यों के मेरा नशीब फ़ुटका था...`
`तीन दिनसे पहेले आप कौनसा साबुन इस्तेमाल करती थी?`
`ये कार्यक्रम करने बाहरगाव गये थे ना, वहां के हॉटेलसे चुराके लेके आये वही छोटी वडी इस्तेमाल करते थे. इनका की नाई नवस है के साबुन विकत आणनेका नही, हॉटेलसे चोरनेका........

******************************************

Wednesday, August 8, 2007

Tuesday, August 7, 2007

Folder Lock without any S/W

Folder Lock without any S/W


Open Notepad and copy the below code and save as locker.bat. Don't forget to change your password in the code it’s shown the place where to type your password.
Now double click on locker .bat
First time start it will create folder with Locker automatically for u. After creation of the Locker folder, place the contents u want to lock inside the Locker Folder and run locker.bat again.



**********************************************************
cls
@ECHO OFF
title Folder Locker
if EXIST "Control Panel.{21EC2020-3AEA-1069-A2DD-08002B30309D}" goto UNLOCK
if NOT EXIST Locker goto MDLOCKER
:CONFIRM
echo Are you sure u want to Lock the folder(Y/N)
set/p "cho=>"
if %cho%==Y goto LOCK
if %cho%==y goto LOCK
if %cho%==n goto END
if %cho%==N goto END
echo Invalid choice.
goto CONFIRM
:LOCK
ren Locker "Control Panel.{21EC2020-3AEA-1069-A2DD-08002B30309D}"
attrib +h +s "Control Panel.{21EC2020-3AEA-1069-A2DD-08002B30309D}"
echo Folder locked
goto End
:UNLOCK
echo Enter password to Unlock folder
set/p "pass=>"
if NOT %pass%==type your password here goto FAIL
attrib -h -s "Control Panel.{21EC2020-3AEA-1069-A2DD-08002B30309D}"
ren "Control Panel.{21EC2020-3AEA-1069-A2DD-08002B30309D}" Locker
echo Folder Unlocked successfully
goto End
:FAIL
echo Invalid password
goto end
:MDLOCKER
md Locker
echo Locker created successfully
goto End
:End

Recover files deleted from recycle bin . . .

Yes yes ... you can recover your files that are deleted by you or some one else from recycle bin . Only one thing is that , you can recove the deleted files that are lastly deleted .

That means if your A file is deleted , you can recover the same untill your another any B file is not deleted . Once the B file is deleted you can recover B file but you can not recover A file .

Here is the link . . .

http://www.undelete-plus.com/files/undelete_plus_setup.exe

Happy undeleting !!

Regards .

Adobe updates .. .

Following is the link for Adobe updates ...

http://www.adobe.com/support/downloads/thankyou.jsp?ftpID=3661&fileID=3438

Happy updates .

Regards .

Download Winrar version

Now a days working with Winrar is not frequent but , we need Winrar version for some files downloaded from internet , you can download from this webpage ...

http://www.rarlab.com/download.htm

Happy downloading .

Regards .

आराम करो

आराम करो



एक मित्र मिले, बोले, “लाला, तुम किस चक्की का खाते हो?
इस डेढ़ छँटाक के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते हो।

क्या रक्खा है माँस बढ़ाने में, मनहूस, अक्ल से काम करो।
संक्रान्ति-काल की बेला है, मर मिटो, जगत में नाम करो।”
हम बोले, “रहने दो लेक्चर, पुरुषों को मत बदनाम करो।
इस दौड़-धूप में क्या रक्खा, आराम करो, आराम करो।

आराम ज़िन्दगी की कुंजी, इससे न तपेदिक होती है।
आराम सुधा की एक बूंद, तन का दुबलापन खोती है।
आराम शब्द में ‘राम’ छिपा जो भव-बंधन को खोता है।
आराम शब्द का ज्ञाता तो विरला ही योगी होता है।
इसलिए तुम्हें समझाता हूँ, मेरे अनुभव से काम करो।
ये जीवन, यौवन क्षणभंगुर, आराम करो, आराम करो।

यदि करना ही कुछ पड़ जाए तो अधिक न तुम उत्पात करो।
अपने घर में बैठे-बैठे बस लंबी-लंबी बात करो।

करने-धरने में क्या रक्खा जो रक्खा बात बनाने में।
जो ओठ हिलाने में रस है, वह कभी न हाथ हिलाने में।
तुम मुझसे पूछो बतलाऊँ — है मज़ा मूर्ख कहलाने में।
जीवन-जागृति में क्या रक्खा जो रक्खा है सो जाने में।

मैं यही सोचकर पास अक्ल के, कम ही जाया करता हूँ।
जो बुद्धिमान जन होते हैं, उनसे कतराया करता हूँ।
दीए जलने के पहले ही घर में आ जाया करता हूँ।
जो मिलता है, खा लेता हूँ, चुपके सो जाया करता हूँ।

मेरी गीता में लिखा हुआ — सच्चे योगी जो होते हैं,
वे कम-से-कम बारह घंटे तो बेफ़िक्री से सोते हैं।

अदवायन खिंची खाट में जो पड़ते ही आनंद आता है।
वह सात स्वर्ग, अपवर्ग, मोक्ष से भी ऊँचा उठ जाता है।
जब ‘सुख की नींद’ कढ़ा तकिया, इस सर के नीचे आता है,
तो सच कहता हूँ इस सर में, इंजन जैसा लग जाता है।

मैं मेल ट्रेन हो जाता हूँ, बुद्धि भी फक-फक करती है।
भावों का रश हो जाता है, कविता सब उमड़ी पड़ती है।

मैं औरों की तो नहीं, बात पहले अपनी ही लेता हूँ।
मैं पड़ा खाट पर बूटों को ऊँटों की उपमा देता हूँ।

मैं खटरागी हूँ मुझको तो खटिया में गीत फूटते हैं।
छत की कड़ियाँ गिनते-गिनते छंदों के बंध टूटते हैं।

मैं इसीलिए तो कहता हूँ मेरे अनुभव से काम करो।
यह खाट बिछा लो आँगन में, लेटो, बैठो, आराम करो।

क्या लोचा है मामू"

क्या लोचा है मामू"

शाम को अपने मुन्ना भाई जी टॉक पर ऑनलाईन टंगे हुए थे कि अचानक गिरिराज जोशी कविराज का मैसेज आया और उन्होंने दो लिंक दिए और कहा कि यह क्या है, पहले तो अपुन सोचा कि लगता है कि अपने ऑर्कुट प्रोफ़ाईल में ये कविराज मामू को कोई गड़बड़ दिखेली है तभीच वो हमसे पूछ रेला कि यह क्या है भाई!फ़टाफ़ट अपन ने थोड़ा खीझते हुए अपने ऑर्कुट अकाऊंट पर लॉगिन किया (क्योंकि अपुन सिरफ़ पब्लिक को रिप्लाई देने के वास्ते उधर जाना पसंद करता है) और मामू के दिए लिंक्स को ओपन कर के देखा तो पाया कि यह प्रोफ़ाईल थी अपने बड़े भैया के छोटे भैया अमर सिंह की और उनके बाजु मे ही अपने खास बड़े भैया अमिताभ बच्चन की लिंक भी थी, बस फ़िर क्या था जोशी मामू लग लिए ऑर्कुट पर ऐसी ही और प्रोफ़ाईल ढूंढने में ( टेंशन ना लो मामू लोग, अपना जोशी मामू खाली पीली बैठा रहा होगा ना अपने दफ़्तर में भीड़ू), फ़टाफ़ट सचिन तेंदूलकर , शाहरुख खान, प्रतिभा पाटिल और ना जाने किन किन के प्रोफ़ाईल ढूंढ डाले और लिंक मेरे कू पकड़ा दिए और बोले एक पोस्ट बनती है इस बारे में ताकि सब लोग मजा ले सकें।अब साला अपुन सोच ही रेला था बहुत दिन से इंटरनेट और चैट के मिसयूज़ पर लिखने का, तो जब जोशी मामू ने मौका दे दिया मतलब कि धकेल कर कहा कि चढ़ जा बेटा सूली पे, तो अपन ने भी सोचा कि चलो लिखने का तो है ही लिख देते हैं, अपना क्या है टेंशन में तो पढ़ने वाले ही आएंगे ना।वो क्या है ना रे सर्किट अपुन जब इधर हिन्दी ब्लॉग जगत में नया-नया आएला था तो अपुन को एक हिन्दी चिट्ठा देखने को मिला था और लिखने वाला मामू ने लिखा था कि वह खुद अमिताभ बच्चन है, ये वाला ब्लॉग इधर रखेला है, अपुन नई जानता कि असली है या नकली।इधर अपुन ये सब सोच रेला था और उधर जोशी मामू ने मेरे कू थोक के भाव मे लिंक दे दिये, इसमें ऐश्वर्या बच्चन के नाम से ब्लॉग भी था। यार सर्किट, इधर अमिताभ के नाम से ब्लॉग है और उसकी बहू ऐश्वर्या के नाम से भी पन साला छोटा बच्चन के नाम से नई हैं अपने अभिषेक मामू को बुरा नई लगता होएंगा क्या, कांप्लेक्स फ़ीलिंग नई होती होएंगी क्या उसकू।

अब अपन सोच रेला है , गलती से कभी कभी सोचने जैसा काम कर लेता है अपुन( दुनिया पे थोड़ा एहसान करने के वास्ते भी और दिखाने के वास्ते भी)ऑर्कुट या ब्लॉग जगत पर ऐसे ही असली लोग भी आ जाए तो यही लगेगा ना मामू हो ना हो ये तो नकली ही होगा, नकल की भीड़ में असल की ही पहचान गायब हो जाएगी फ़िर तो, ये तो लोचे वाली बात है ना रे सर्किट।वैसे अपन को मालूम है कि इधर इंटरनेट पर खुराफ़ाती दिमाग वाले मामू लोग ऐसे ही खुराफ़ात करते रहते हैं,।

वो क्या है ना कि पिछले दिनों ऑर्कुट को बैन करने की मांग उठी थी उसके पीछू भी ऐसेइच कुछ कारण थे ना। जो भीड़ू और मामू लोग ऑर्कुट पर "सर्च की" का ज्यादा यूज़ करते हैं वो यहीच सोचते होंगे कि या खुदा ऑर्कुट का ऐसा भी उपयोग!!






इंटरनेट पर चैटिंग का लोचा हो या फ़िर ऑर्कूट का लोचा, इधर खुराफ़ाती भीड़ू लोगां के लिए बहुत कुछ है करने के वास्ते, मान लो किसी मामू को उसकी इंटरनेट चैट फ़िरेंड जो कि ब्यूटीफ़ुल है ने कोई भाव नई दिया अब खुन्नस में आके वो साला मामू अपनी फ़िरेंड का पर्सनल डिटेल जैसे कि फोन नंबर और सब चैट रुम में पब्लिकली कर देता होएंगा तो।ऐसे ही मान लो कोई बाई अपने किसी फ़िरेंड को अपना वेबकैम दिखाती होएंगी और वो खुराफ़ाती वेबकैम देखते-देखते उसकू रिकार्ड कर डाले तो। अब ऑर्कुट पे ही प्रतिभा पाटिल वाले प्रोफ़ाईल में देख लो ना मामू, उसमें एक फोन नंबर भी दिएला है। अब अपुन तो नई जानता कि वो कहां का और किसका नंबर है, पन खुराफ़ाती भीड़ू लोग उसपे कॉल नई कर सकते क्या।
तो मामू , सबको मालूम तो हइच कि तस्वीर का दो रुख होने का तो बाई लोग थोड़ा सेफ़ हो के चलने का ना इधर, नई तो बाद में टेंशन लेने का हो जाता।

यू नो सर्किट, अरे वो थोड़े दिन पहले सबसे तेज़ चलने वाले चैनल पर एक कार्यकरम भी आया था ना इसी टाइप का, कि इंटरनेट पर एक बंदे ने महसूस करके नाम वाली कोई एक ऐसी साईट बनाई है जिसपे ऐसे ही खुराफ़ाती वेबकैम वाले फोटोज़ का मिक्सिंग करके डाल देते और फ़िर जिसकी फोटो है वो टेंशन में जीए।

भीड़ू ऐसा है कि इंटरनेट पर सबसे ज्यादा चैटिंग अपने यहां याहू पर होती और सबसे ज्यादा लोचे भी याहू पर ही होते हैं सबसे ज्यादा काड़ी वाले साफ़्टवेयर भी याहू के लिए ही बनाते है अपने यहां के खुराफ़ाती भीड़ू लोग, मालूम तेरे कू कैसे कैसे, ले सुन ले-- वेबकैम रिकार्ड करने का, पासवर्ड चुराने का, चैटरुम में स्पाम बोट्स डाल के चैट रुम्ज़ को फ़ुल्ल कर देने का, थोक के भाव में बोट्स आई डी डाल कर गालियां देने का, किसी को कैसे जबरदस्ती उसकीच आई डी से जबरदस्ती साईन आऊट कराने का मतलब कि बूट कर देने का। याहू के मार्फ़त फ़ाईल भेजकर तुमेरे सिस्टम की जानकारी हैक करने का, और नई मालूम रे पन साला इत्ता सब है कम है क्या।

मालम तेरे कू सर्किट , खुराफ़ात ये खुराफ़ाती भीड़ू लोग करता है और साला भुगतना सब अपने सीधे मामू लोगों को भी पड़ता है।क्या बोला, कैसे?तो सुन, अरे बावा इत्ता सब खुराफ़ात होने के बाद सरकार और इंटरनेट के बॉस लोग जागते हैं और फ़िर उठा के सीधे उस साईट को ही अपने यहां बैन कर देते हैं ना रहे बांस ना बजे बाँसुरी।
अब भुगतो सीधे मामू लोग भी, पिछले साल अपने यहां ऐसाइच हुआ था ना यार, भूल गए क्या मामू।

मुन्नाभाई मीट्स हिंदी ब्लागर्स - 2

मुन्नाभाई मीट्स हिंदी ब्लागर्स - 2
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....इस पर दो-तीन वरिष्ठ चिट्ठाकारों ने यह कहते हुए मुन्ना को समझाने की कोशिश की-"मुन्ना,यह राष्ट्रभाषा प्रेमियों के द्वारा इंटरनेट पर हिंदी के प्रचार-प्रसार का मामला है अत: वैसी ही हिंदी चाहिए।"
मुन्ना फ़िर भड़का-" साला मामू लोग, तुम लोग क्या सोचता है अक्खा इंडिया मे कित्ता लोग किताबें पढ़ता है जो तुम्हारे बिलाग की किताबी हिंदी समझेंगा। अबे अपुन के माफ़िक लिखो फ़िर देखो कैसाअक्खा दुनिया का लोग हिंदी समझेंगा फ़टाक से।"
इसी दौरान सरकिट ने कुछ ब्लागर्स के बारे में जानकारी ली कि कौन,कौन है और मुन्ना को खींच कर उनके पास ले गया।
सरकिट- "भाई ये "उड़नतश्तरी" हैं।"मुन्ना- "हां रे सरकिट देख के तो लगिच रहें हैं। तो तू ही उड़नतश्तरी है मामू। सुना है कि पब्लिक को पोयम सुना-सुना के……शूं…शटाक…… करते हुए फटाक से निकल लेते हो। दूसरों की सुनतेच नई।उड़नतश्तरी- "अरे नही मुन्ना भाई। यह तो गलत सुना है आपने। बल्कि हम ही तो पहले इंसान होते है जो किसी चिट्ठे पर पहुंचते हैं, दुसरों की सुनते,पढ़ते और टिपियाते हैं।"मुन्ना- " ए चल ना,मेरे कू मामू मत बना। वो सब तो रेडीमेड कमेंट होता ना,बस बिलाग पे गया दो लाईन कापी किया और अपने रेडीमेड कमेंट के साथ चिपका दिया। और सुन मामू ये मत सोचनाकि मुन्ना के एरिया में आएला है इसलिए मुन्ना ने चमका दिया। अपुन को वो क्या है कि अमेरिका के प्रेसीडेंट ने बुलाएला है मीटिंग करने के वास्ते। तभीच अपुन तुमसे तुम्हारे एरिया में मिलेंगा औरनारद पे रजिस्ट्री नई मिला ना तो वहींच निपटाएंगा तुमको। बच के रहना रे बाबा-बच के रहना रे।"
सरकिट- " भाई,ये "मेरा पन्ना" वाले ताऊ हैं। आजकल यही संभाल रहे हैं नारायण-नारायण करने का ज़िम्मा।"मुन्ना- "ऐसा क्या! क्यों मूंछ वाले मामू बोले तो ताऊ। क्या बोलता ये अपना सरकिट,नारद को तूहीच संभालता ना,नारायण-नारायण करता डोलता फ़िरता फ़िर भी मेरे कू उधर रजिस्ट्री नहीं देता,ऐसा काय कू करता रे ताऊ।"(ताऊ ने जवाब देने के लिए मुंह खोला ही था कि…)मून्ना- "ओये बस! मेरे कू नारद पे रजिस्ट्री मांगता याने मांगता बस! वैसे अपुन सुना है कि तू अभी इंडिया फ़िर से आने का प्लान बना रेला है पन मामू यहां से अभी जाने देंगा तभीच फ़िर से इंडिया आएंगा ना। जाएंगाइच नई तो आएंगा कैसे रे मामू,बोल टपका दूं क्या अभी के अभीच। सुन एक मांडवली करेगा क्या, कुवैत के तेल का दो नंबरी धंधा मेरे साथ करेंगा तो बोल……"
सरकिट- "भाई, ये "ई-पंडित"………"मुन्ना- " ओ हो! तो ये है ई-पंडित,सुन ओय मामू इधर आना तो। ये बता ये ई-पंडित होता क्या है। अपुन खाली वो पंडित जानता जो स्वाहा करवाता,जो मंदिर में घंटी बजाता पन ये ई-पंडित अपुन ने पहली बार सुना रे। अपुन को नारद पे एंट्री दिला फ़िर देख अपन दोनों तेरी पाठशाला में बैठ के कैसे एक साथ काड़ी करते हैं मामू। याद रखने का ना, अगर अपुन को नारद पे रजिस्ट्री नईमिली ना तो ना रहेगा ई और ना रहेगा पंडित। बाकी रहेगा सिरफ़…घं……।"(इससे पहले कि ई-पंडित कुछ बोलें सरकिट ने मुन्ना को आगे बढ़ा दिया)
सरकिट-" भाई! ये "अज़दक" वाले प्रमोद साहब हैं। फ़िलम में लिखते हैं।"मुन्ना-" वाह-वाह! क्या मामू कैसा है। यार एक बात बता,तेरे की नींद ना आने की बीमारी है क्या। तेरा बिलाग देख के तो अपुन साला सोचने लगता है कि तू सोता भी है या नई। इतना लिखताहै,लिखने के लिए सोचना भी होएंगा ना कि बिना सोचे लिख देता है पन पढ़ के तो ऐसा नई लगता कि बिना सोचे लिखता होएंगा। और फ़िर जब इतना सोचता होएंगा तो सोता कब होएंगा। सोते में भीबिलाग के लिए वो क्या कहते है, टापिक सोचता क्या। ए मामू कुछ कर यार सब फ़िलम की स्टोरी पे भी और नारद पे अपुन की रजिस्ट्री के वास्ते भी नई तो…………………और मुन्ना आगे बढ़ जाता है।
सरकिट- "भाई इधर मिलो ये है
"आवारा-बंजारा""
मुन्ना-" क्या चिकणे,साला सफ़ेद कुर्ता और काला चश्मा वाला फोटू अपने बिलाग पे सजा के क्या सोचता रे तू। अपने को डान के माफ़िक सोचता क्या! चल एक बात बता,तू लिखता क्या है तेरे को खुद मालूम क्या और उसको पढ़ता कौन ढक्कन है। चल एक काम करना,अपुन बोलता जाएंगा तू उसको मेरे बिलाग में लिखता जाएकर,खूब रोकड़ा बनाएंगा मेरे साथ रहेंगा तो। तेरे कू मालूम ना कि अपुन इधर क्यों आएला है,रजिस्ट्री के वास्ते।"( मुन्ना के मुंह से यह सब सुनकर ही आवारा-बंजारा की हवा हो गई और वह कल्टी हो गया भीड़ में)
सरकिट- "भाई! ये हैं "मोहल्ला"………"मुन्ना- "क्या रे मामू! कोई केमिकल लोचा है क्या भेजे में। साला अपुन देखता इधर तेरे बिलाग पे आए दिन कोई ना कोई लोचा हुआ पड़ा रहता। क्या पिछले जनम का कोई रिश्ता है क्या लफ़ड़ों से। वैसे सुन एक काम की बात,वो क्या है ये जो "इंडिया" है ना यहां के लोग एकदमीच मामू हैं,समझदारी की बात करेंगा तो सुनने कोई नई आएंगा बस लफ़ड़ाच ज्यादा होएंगा। इसी वास्ते समझदारी का बात ज्यास्ती नई करने का। आजकल समझदारी कोई बांटने का चीज नई,संभाल के बैंक लाकर में रखने की चीज है रे मामू। चल बता नारदपे मेरी रजिस्ट्री कब तलक करवा रेला है सुना है तेरी पहुंच उपर तक है। सुन ले रजिस्ट्री नई मिला ना मेरे कू तो तेरे मोहल्ले में बिना "पुलिस" के ही कर्फ़्यू लगा जाएंगा।"
इसी बीच मुन्ना की नज़र महिला ब्लागर्स पर गई और उसने सरकिट से पूछा-"ए सरकिट, ये बाई लोग कौन रे।"
सरकिट ने तब तक इनकी भी जानकारी बटोर ली थी सो फ़टाक से बोला-" भाई ये सब घर कीच है। ये बाई लोगों को इज्ज़त देने का,ये सब लेडीज़ बिलागर हैं।"इतना सुनते ही मुन्ना ने हाथ जोड़े और कहा-"आप लेडीज लोग तो जानतीच है ना कि अपुन कैसा सीधा,साफ़ दिल का आदमी है। पिछली बार "बापू" ने अपुन को बोला कि विनम्रता के साथ बोलने सेसब काम होइच जाता है। इसी वास्ते अपुन हाथ जोड़कर विनम्रता के साथ आप सब से रिक्वेस्ट करेला है कि अपुन के बिलाग को नारद पे रजिस्ट्री दिलाने का नई तो साला अपुन ये सब मामू लोग को यहींच टपका देंगा और वो क्या कहते है इंटरनेट पर आग लगा देंगा।"
मुन्ना के इतना कहते ही महिला ब्लागर्स के दल में कानाफ़ूसी और खिलखिलाहट शुरू हो गई।तभी सरकिट फ़िर कहीं से एक चक्कर मार कर आया और महिला ब्लागर्स से मुन्ना का परिचय कराने लगा-
सरकिट-"भाई ये "घुघूती बासूती" और
"बेजी" हैं।"
मुन्ना(हाथ जोड़कर)- " वो क्या है कि अपुन को कविता-वविता तो समझ में नई आती। आप बस इस "कविता" का एड्रेस दे देना अपुन उसके एड्रेस पे जाकर समझ लेंगा उसको फ़ुर्सत में। पन वो क्या है ना कि आप बाई लोग बढ़िया लिखेली हैं, जब अपुन का "हायर" वाला श्याणा बंदा अपुन को आप लोगों के लिखे का मतलब समझाता है तो साला नई मालूम अपन की आंख में कई बार अपने-आप पानी क्यों आ जाता है। आप बाई लोगन तो इन सब मामू लोगन से ज्यादा "समझदार" हो, बोलो इन सबको कि अपुन को नारद पे एंट्री देने का।"
इस से पहले कि महिलाएं कुछ बोल सकें मुन्ना आगे बढ़ चुका है( शायद जानता है कि अगर महिलाओं को बोलने का मौका दे दिया तो फ़िर वह खुद नहीं बोल पाएगा सिर्फ़ सुनता रह जाएगा)
सरकिट- "भाई ! ये " a लिंकित-मन?<>वाली मेडम हैं।"
मुन्ना- " नमस्ते! ये लिंकित मन क्या है अपने सर के उपर से निकल गया। पन मेडम अपुन का फ़ैमिली नई है अभी, आप बाई लोगन इधर एंट्री दिलाएगा अपुन को फ़िर अपुन इधरीच किसी सेसेटिंग करके शादी बनाएगा तब जाके अपुन का अक्खा फ़ैमिली इधर बिलाग पे होएंगा,पिलीज़ समझने का ना मेडम इसलिए अभी अपुन सिर्फ़ इतनाइच बोलेंगा कि………रजिस्ट्री………।"
सरकिट- "भाई! ये
"मान्या",
"सुनीता(शानू)" और
"रंजना भाटिया" हैं।"
मुन्ना- "अरे सरकिट! बोले तो ये वई लोग हैं ना जिनकी लिखी पोयम का प्रिंट आउट अपना "श्याणा बंदा" निकाल के अपन को हफ़्ते के हफ़्ते देता है, अपनी फ़िरेंड छोकरी लोग को दे के इंप्रेस करने केवास्ते। थैक्यू बोलता है अपुन आप लोग को। साला पता नई अपुन के माफ़िक कितना छोकरा लोग आप लोगन की पोयम टाप-टाप के अपनी छोकरी फ़िरेंड को इमप्रेस करने के वास्ते देता होएंगा। अपुन आप लोग की पोयम का इत्ता पब्लिकसिटी करता है और आप लोग है कि अपुन को नारद पर एंट्रीच नई देता। देने का ना।
सरकिट-" भाई ये "गरिमा" जी हैं जो अक्सर कहती रहती है कि मैं और कुछ नई"
मुन्ना--" अरे आप वईच हैं ना जो वो, वो क्या कहते है हां एनरजी हीलर। क्या
"जीवन उरजा-मानसिक तरंगे"बड़बड़ाते रहती हैं। मेडम ये सब लोचे अपुन के भेजे में नई आते, ये अपना "श्याणा बंदा" अपुन को समझाते रहता फ़िर भी नई आता। साला अपुन का मगज है ही ऐसा ढक्कन के माफ़िक, एक काम करने का ना मेडम,कबी "फ़ुरसतिया" वाली फ़ुरसत में अपुन को ये सब ऐसे समझाने का कि डायरेक्ट अपुन के भेजे मे फ़िट हो जाए। फ़िर देखो साला अपुन का धमाल"
इधर यह सब चल ही रहा था और उधर महिला व पुरुष दोनों ही ब्लागर दलों में सबके चेहरे पर इस बात की चिंता घिरने लगी थी कि अंधेरा हो रहा है। अपने-अपने ठीये तक पहुंचते-पहुंचते रात हो जाएगी लेकिन वह भी तब जब यह मुन्ना सब को बख्श दे और जाने दे। अधिकतर इसी बात को सोचते हुए टेंशनियाए थे कि मुन्ना के चलते कहीं खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी ना पड़ जाए। बस यही सब सोचकर सबने निर्णय लिया कि नारद पर फ़िलहाल मुन्ना को एंट्री दे ही दी जाए। फ़िर क्या था पूरा जुहू बीच गूंज उठा हिंदी ब्लागर्स की
"सामूहिक आवाज" से -" मुन्ना! स्पेशल केस मानते हुए कल सुबह तक "नारद" पर तुम्हारा"रजिस्ट्रेशन" पक्का हो ही जाएगा।
इतना सुनते ही मुन्ना ने फ़ौरन कहा-" वाह मामू ये हुई ना हैप्पी एंडिंग वाली बात। चल सरकिट इसी खुसी में सबको मिठाई खिला। अब अपुन बाकी मामू लोग की खबर बाद में लेगा।"
फ़िलहाल समाप्त!!!
सूचना-- कृपया इस सीरीज़ की पोस्ट को सिर्फ़ बतौर मनोरंजन ही लें!! यदि इसे उल्लेखित व्यक्ति आक्षेप के रुप में लेते हैं तो क्षमा!!!

मुन्ना भाई मीट्स हिंदी ब्लागर्स-1

मुन्ना भाई मीट्स हिंदी ब्लागर्स-1

पता नहीं किस मूहूर्त में नारद के अधिकतर हिंदी ब्लागर्स ने तय किया कि एक वृहत ब्लागर्स मीट आयोजित कर सारी दुनिया फ़ैले नारद भक्तों को बुलाया जाए। तय यह हुआ कि यह मीट रखी जाएगी मुंबई में। बस फ़िर क्या था फ़टाफ़ट सारी दुनिया में फ़ैले नारद भक्तों के फोन खड़खड़ाए जाने लगे, ई-मेल पर ई-मेल भेजे जाने लगे कि किसी भी हालत में आपको आना ही है।तय तारीख को मुंबई निवासियों ने देखा कि क्या बात है आज जुहू बीच पर अजीब तरह के लोग कुछ ज्यादा ही दिख रहे हैं जो आपस में ना जाने क्या बातें कर रहे हैं। कभी कभी तो ऐसा लगा कि बस अब लड़ाई होने ही वाली है। पर नहीं यह अजीब लोग तो आपस में कुछ विवादस्पद विषयों को लेकर बहस मात्र कर रहे थे। खैर! जैसा कि मुंबई वासियों की आदत है अपने में ही व्यस्त रहने की तो बस यही सब सोचते रहे और टहलते हुए वहां से निकल लिए।जुहू बीच पर जो कुछ ज्यादा ही अजीब लोगों की भीड़ दिखाई दे रही थी ये और कोई नहीं सब "नारद मुनि" के भक्त हिंदी के चिट्ठाकार थे जो कि आओ प्यारे सिर टकराएं की तर्ज पर आपस में चिंतन-मनन,विचार-विनिमय में लगे हुए थे। बीच-बीच में जुहू बीच को हिला देने वाली किन्हीं एक दो सज्जनों की भी हंसी भी गूंज रही थी। वहीं एक "सज्जन" टी-शर्ट और घुटन्ना (बरमूड़ा) पहने अपने ही बनाए "स्पेशल काकटेल" चुसकते हुए अपने आस-पास बैठे युवाओं से जिस अंदाज़ से बतिया रहे थे उस से स्पष्ट समझ आ रहा था कि वह गुरु हैं और आसपास बैठे युवा उनके शिष्य। अपने शिष्यों को शिक्षा देते हुए यह सज्जन बीच-बीच में जोर से "अहा आनंदम-आनंदम" कहे जा रहे थे क्योंकि ना चाहते हुए भी उनकी नज़र आस-पास भटकना चाह रही थी पर उनका एक "शिष्य" उनसे पहले से ही अपनी नज़रें आसपास भटका रहा था। दरअसल आसपास बहुत सी फ़िरंगी मेम छतरी तान कर धूप स्नान कर रही थी।दूसरी तरफ़ ब्लागर कम पत्रकारों की जमात में सब आपस में दुखड़ा रो रहे थे। दुखड़ा कुछ यूं था- "यार क्या करें हम तो बंधुआ मजदूर हो कर रह गए हैं। बस इससे कुछ सवाल पूछो,उससे कुछ सवाल पूछो वह भी विवादास्पद सवाल। बस पब्लिक की पसंद के चक्कर में उपर का आदेश मानते हुए टी आर पी बढ़ाने वाले मामले कवर करने में लगे रहते हैं। अपनी मर्जी से तो कुछ कर सकते नहीं,ले दे कर यह एक ब्लाग नाम की चीज मिली जहां कम से कम अपनी पसंद का कुछ लिख तो सकते हैं भले ही वह और ज्यादा विवादास्पद हो। पर यहां आने के बाद तो क्या गली क्या "मोहल्ला" और क्या "कस्बा" सब जगहों के बच्चे तक मुंह चिढ़ाने लगे हैं। खैर! हम पत्रकार हैं हार कैसे मान लें हम लिखते रहेंगे, मुद्दे उठाते रहेंगे और लोगों को जागरुक बनाते रहेंगे।इधर कंप्यूटर, तकनीकी और चिट्ठा विशेषज्ञ ब्लागर्स भी बैठे हुए थे । यह सब इस उधेड़बुन में लगे थे कि ब्लागर्स के लिए नई बातें,नई तकनीकें सामने लाएं तो कहां से और किस तरह की।ध्यान देने लायक बात यह थी कि इस वृहत ब्लागर मीट में बहुत सी महिला ब्लागर भी मौजूद थीं। "रत्ना की रसोई" के पकवानों को चखकर तारीफ़ करते हुए आपस में चर्चा कर रही थी। इनके बीच चर्चा का सबसे पहला मुद्दा यह था कि कौन दफ़्तर और घर के कामों के बाद भी ज्यादा से ज्यादा पोस्ट लिखने में सफ़ल है। साहित्य-दुनिया-मनोविज्ञान-आत्मिक उर्जा के अलावा भी सब महिला ब्लागर दिलोजान से जो एक खास चर्चा कर रही थी बस वही,वही एक चर्चा पुरुषो के लिए अनझेलेबल थी क्योंकि वह चर्चा थी मेकअप,साड़ी,गहने और शापिंग पर।इन सबके बीच सबसे खास बात जो किसी को नहीं मालूम थी वो यह कि मुंबई के फ़िल्मी ब्लागर्स के माध्यम से सरकिट को इस ब्लागर्स मीट की खबर किसी तरह लग गई थी। दोपहर खत्म होते होते सरकिट पहूंच गया मुन्नाभाई को लेकर इन नारद भक्तों के बीच। मुन्नाभाई को देखकर सभी चिट्ठाकर खुश हो गए कि चलो आज का दिन सफ़ल तो हुआ।लेकिन मुन्ना थोड़े टेंशन में दिखाई दे रहा था,अचानक बोला " क्यों रे मामू लोग तुम लोग अपने को क्या समझेला है, साला क्या बोलते हैं इसको ये बिलाग तुम्हारे घरीच की खेती है क्या। अपुन को साला ये सरकिट ने बताया कि भाई ये बिलाग अब हिंदी में भी बनेला है तो अपुन बोला अपन भी बना लेते है थोड़ा रोल और हूल देने के काम आएंगा पब्लिक को। अपुन ने वो डिब्बा, ए सरकिट क्या बोलते वो डिब्बे को" सरकिट ने फ़ौरन जवाब दिया"भाई, कंपूटर। मुन्ना फ़िर शुरु हो गया " हां वईच,अपुन ने कंपूटर जुगाड़ा,वो वो इंटरनेट कनेक्सन जुगाड़ा और फ़िर एक पढ़ा लिखा श्याणा बंदा 'हायर' किया जो कंपूटर और उसपे लिखने कू जानता। उसीच श्याणे ने अपुन को वो क्या नाम है नारायण-नारायण वाले का,हां नारद। नारद के बारे में उसी ने बताया अपुन को। अपुन बोला नारद पे बाकी सब को रोकने का और सबसे पहले अपुन का रजिस्ट्री करने का मांगता,अपुन का लिखा अक्खा दुनिया का लोग पढ़ेंगा और क्या। पन दो-तीन दिन बाद वो मेरे कू बोला भाई नारद ने अपना बिलाग रजिस्ट्री करने से मना कर दियेला है। काएकू पुछने पे बताएला कि खाली हिंदी चलता उधर । अपुन ने पुछा इस श्याणे से कि अपुन क्या कोई फ़ारेन लेंग्वेज बोलता क्या तब उसने दिखाया कि नारद वालों को कैसी हिंदी मांगता। साला देखकेइच अपुन का भेजा घुम गएला है। वो क्या है ना भाई लोग कि अपुन को लिखने का नई आता उपर से कंपूटर पे लिखना तो औरीच नई आता ना इसीलिए अपुन ने इस बंदे को ठीक करेला। अपुन बोलता जाता है और ये 'हायर' किया बंदा ठीक वैसाईच लिखता जाता है। अब बोलो मामू लोग मेरे कू रजिस्ट्री देगा कि नई नारद पे?"

हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा

मूल लेख मैने http://aaina2.wordpress.com/2007/08/02/anugunj/ यहा से लिया है

इस लेख के मूल लेखक श्री जगदीश भाटिया जी है

हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा

भई अब हम तो कभी अमेरिका गये नहीं और अमेरिका को जितना जाना समाचारों और टी वी के जरिये। हम तो इतना जानते हैं कि अपनी 10000/- रुप्पल्ली की तनख्वाह $10000/- हो जाती। वैसे जितना मैं इस बारे में सोचता हूं उतना ही रोमांचित होता जाता हूं।
हमारे समाचार चैनल तो अभी से भारत को अमेरिका बनाने पर तुले हैं। इन्हें देखने पर लगता है कि हमारी सारी युवा पीढ़ी या तो अश्लील एम एम एस बना रही है या फिर इसी तरह के कोई घटिया काम कर रही है। चैनलों का ध्यान सैलिब्रिटीस की जेल यात्रा पर ज्यादा है और बिहार और असम में आयी बाढ़ पर कम। हम बनायें या न बनायें हमारे चैनल वाले भारत को अमेरिका बनाने पर तुले हैं। इन्ही चैनलों से घ्यान आया सोचिये हमारे राष्ट्रपति के चुनाव अगर अमेरिकी स्टाइल में टीवी चैनलों की बहस से लड़े जाते। भूत पिशाच और आत्माओं को दिखाने वाले चैनलों को इन विषयों पर बात करने के लिये सही प्रत्याशी मिल जाते। अब यह देखने वाली बात होती कि चैनल प्रत्याशियों की बातों का अनुमोदन कर रहे होते या प्रत्याशी चैनलों की बातों का। प्रत्याशी कहते कि फलाने दिवंगत नेता की आत्मा ने मुझे कहा कि मेरे दल के सारे एमपी और एमएलए आपको ही वोट देंगे। यकीन मानिये हमारे चैनल कोई न कोई स्टिंग ऑप्रेशन करके इसका सबूत भी ले आते। अब उस दल के सदस्य बेचारे अपनी अंतरात्मा और दल के नेता की आत्मा की आवाजों के बीच बुरी तरह कन्फ्यूज हो जाते।
हमारे पड़ोसी हमारे पड़ोसी नहीं होते। शायद घूसपैठ की समस्या नहीं होती। हां हो सकता है कोई दूसरे तरीके की समस्यायें हो जातीं। आप बीस क्या दो सौ मोस्ट वांटेड की लिस्ट भी देते तो रातों रात बंदे आपकी सेवा में भिजवा दिये जाते। वैसे मैं तो यह सोच कर ही रोमांचित हो जाता हूं कि फिर अपने मन्नू भाई मूषकर जी को उठक बैठक भी करने को कहते तो वे करते। (मजाक में कही गयी इस बात को इस तरह पढ़ें कि फिर इन दोनों की बॉडी लेंग्वेज़ कुछ अलग ही होती)
और आखिर में एक बात इस आजादी के साठ साल पूरे होने के अवसर पर अपने दिल की गहराई से कह रहा हूं कि यदि भारत अमेरिका होता तो शायद इस दुनिया में ज्यादा शांती होती और इंसानों में ज्यादा बराबरी होती।

Hindi Kavita

हाथ हमारे भी इस बहती गंगा में धुलवानाजी
ढपली एक हमारी उस पर तुम भी थाप लगाना जी

हम जब मुर्गी आयें चुराने, दड़बा खुला हुआ रखना
और दूसरा कोई आये, चोर चोर चिल्लाना जी

हाय हिन्दू हाय मुस्लिम, इससे आगे बढ़े नहीं
माना है ये खोटा सिक्का, हमको यही चलाना जी

फ़ुल्ले फ़ूटे हुए, हवा के साथ चढ़ चुके हैं नभ पर
ठूड्डी शेष पोटली में है, उसे हमें भुनवाना जी

मस्जिद में फ़ूटे बम चाहे मंदिर का हो कलश गिरा
हमको सब कुछ गुजराती के मत्थे ही मढ़वाना जी

बाकी के सब शब्द आजकल हमको नजर नहीं आते
इसीलिये तो नारद नारद की आवाज़ लगाना जी

कौन यहाँ किस मतलब से है, इससे कोई नहीं मतलब
सिर्फ़ हमारा झंडा फ़हरे, इसकी आस लगाना जी

कुछ भी समझें या न समझें, आदत लेकिन गई नहीं
काम हमारा रहा फ़टे में आकर टांग अड़ाना जी

वैसे तो है निहित स्वार्थ अपना, पर क्यों हम बतलायें
इस्तीफ़े की गीदड़ भभकी, केवल हमें दिखाना जी

क्रिकेटः देश के विकास की राह में रोड़ा

क्रिकेटः देश के विकास की राह में रोड़ा
आप कहेंगे कि ये लड़का कुछ पगला गया सा लगता है. इस देश के क्रिकेटभक्त इस जुर्म के लिए मुझे लालकिले पर फांसी भी दे सकते हैं। फांसी पर झूलने के लिए मैं भी गला साफ करके तैयार हूं लेकिन मेरी अंतिम ख्वाहिश है कि मेरी बात सुन ली जाए. क्रिकेट के खिलाफ बात पूरी नहीं करने दी जाती, ये भी कोई कम सजा है.देश की सौ करोड़ से ज्यादा की आबादी में यूं ही बेरोजगारों की बड़ी फौज है। बचीखुची कामकाजू आबादी पर क्रिकेट का भूत किस कदर सवार है, इसका आलम उस दिन नजर आता है जब ऐन मौके पर दुनिया की सबसे बड़ी निकम्मी टीम साबित हो जाने वाली भारतीय टीम के मॉडल कहें या खिलाड़ी, किसी के खिलाफ मैदान में उतरते हैं.देश के विकास में क्रिकेट का कितना योगदान है और कितनी संभावनाएं बची हुई हैं, ये शोध का विषय हो सकता है। लेकिन, इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि जिस दिन कोई क्रिकेट मैच हो, सरकारी दफ्तरों, यहां तक कि कॉरपोरेट ऑफिसों में भी काम की रफ्तार बेकार हो जाती है. इंदिरा आवास का आवेदन लेकर कोई बेघर बीडीओ साहब के दफ्तर पहुंचा होता है और साहब घर पर मैच का मजा उठा रहे होते हैं. किरानी, चपरासी और बड़ा बाबू भी रेडियो से चिपके नजर आते हैं. ऐसा ही नजारा दूसरे दफ्तरों में भी दिखता है. सड़क किनारे वैसी दुकानों पर मजमा ही लग जाता है, जहां कोई टीवी मैच दिखा रहा हो. देश के हर आदमी को मनोरंजन का अधिकार है लेकिन आम लोगों के काम को टालकर अगर मैच देखा जाए तो इस पर मुझे गहरी आपत्ति है. और, अगर आपको इस तरह के काम से परेशानी नहीं होती तो मेरी नजर में आप देशद्रोही जैसे ही हैं. मेरा तो यह भी मानना है कि पाकिस्तान जाली नोट भेजकर हमारी अर्थव्यवस्था को जितना नुकसान नहीं पहुंचा पाता है, उससे ज्यादा नुकसान श्रम दिवस की क्षति के लिहाज से क्रिकेट का मैच पहुंचाता है. ये अंग्रेज तो चले गए लेकिन कभी अपने गुलाम रहे भारत और हमारे पड़ोसी देशों (तब अविभाजित) को कुछ ऐसे रोग देकर गए जो उनसे आगे निकलने में हमारा रास्ता रोक लेते हैं. हम सोचते हैं कि सचिन के छक्के ब्रितानी सिपाहियों की गोलियों का जवाब है.मेरी राय में क्रिकेट ऐसे लोगों का खेल है, जिनके पास पर्याप्त पैसा और उससे भी ज्यादा फालतू समय हो। भई, अब 100 ओवर का खेल देखने या खेलने के लिए दस घंटे का खाली समय भी तो चाहिए. और, भारत जैसे गरीब देश के कुछ करोड़ कामगारों को अगर एक ऐसे खेल को देखने, सुनने, खाने, पीने, गाने, नहाने... की लत लगती जा रही है तो यह आत्मघाती ही है. साल भर में ये खिलाड़ी कम से कम कुल मिलाकर दो महीना कहीं न कहीं खेलते रहते हैं. ये अलग बात है कि इनकी खबरें सालों भर छपती रहती है. मैच न हो तो खिलाड़ियों की निजी जिंदगी ही सही. इस लिहाज से सालाना तौर पर देखें तो करीब साठ दिन भारतीय कामगारों की कार्यक्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता है. इनमें से कई करोड़ श्रमिक मैच के दिन अपने काम को न्यूनतम उत्पादन स्तर पर पहुंचा देते हैं. गरीबी से जूझ रहे एक देश के लिए श्रम दिवस का इससे बड़ा अपव्यय कुछ और नहीं हो सकता.पता नहीं, अपने देश में फुटबॉल और हॉकी की ऐसी दुर्गति क्यों है? खेल उत्पादों का बाजार और मीडिया के अंदर प्रचार के पैसे का लोभ भी इसकी एक वजह नजर आती है। फुटबॉल या हॉकी खेलने के लिए कम से कम एक लंबा-चौड़ा मैदान चाहिए होता है. क्रिकेट तो गली-नुक्कड़ों के साथ ही साथ बंद या हड़ताल के दौरान किसी राजमार्ग पर भी खेला जा सकता है. तो देश में ऐसे खेल को लेकर सनक पैदा करने का क्या फायदा, जिसे खेलने वाले ही कम पड़ जाएं. क्रिकेट की सनक ने सड़क-गली-नुक्कड़ तक में दस-दस टीम बनवा दिया है. इतनी टीमों को खेलने के लिए लाखों बल्ले, गेंद, और भी न जानें किन-किन चीजों की जरूरत पड़ती है.एक खेल में उपकरण और सामान का इतना बड़ा बाजार बन जाता है कि सिर्फ जर्सी, बूट, नेट और बॉल या स्टिक व गेंद वाले खेल फुटबॉल और हॉकी को भारत के बड़े बाजार ने बेगाना सा बना दिया है. खेल संघों पर काबिज नेताओं की करतूतें भी मजेदार ही है. मीडिया वाले बाजार के हाथों खेलते भी हैं और सीना ठोंककर कहते हैं कि लोग यही देखना चाहते हैं. क्रिकेट के व्यापारी दर्शकों को बांधे रखने के लिए रोज नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. ट्वेंटी-ट्वेंटी नया अस्त्र है. यूरोप के खेलप्रेमियों का शौक उम्दा है. वे क्रिकेट देखते हैं लेकिन फुटबॉल या दूसरे खेलों की कीमत पर नहीं. विकसित और संपन्न देशों में भी फुटबॉल के खिलाड़ियों की कमाई या लोकप्रियता हमारे या उनके देश के किसी भी सफलतम क्रिकेट खिलाड़ी की जादू पर बहुत भारी है. कहा भी गया है, घर की मुर्गी दाल बराबर. हम भारतीय हिन्दी भाषा की तरह ही देश के अन्य खेलों का सत्यानाश कर रहे हैं. एक फिल्म है, चक दे इंडिया. हॉकी के भारतीय जीवन को इस फिल्म से कुछ सांसें और कुछ ताकत मिल जाए, तो यशराज फिल्मस के यश में भी वृद्धि हो. शाहरूख को मेरी शुभकामना है. सौ फूलों का खिलना देश के लिए, खिलाड़ियों के लिए और दर्शकों के लिए भी बेहतर होगा. रोजगार के मौके बढ़ेंगे. खेलप्रेमियों के सामने दर्शन का विकल्प भी...

संडे सूक्ति-हसबैंड उर्फ आठ सौ जीबी की मेमोरी

संडे सूक्ति-हसबैंड उर्फ आठ सौ जीबी की मेमोरी
संडे सूक्ति -हसबैंड उर्फ आठ सौ जीबी की मेमोरीवही हुआ, जो होना नहीं चाहिए था, पर हमेशा होता है।घर से आर्डर था कि भुट्टे लेकर आना, मैं खरबूज लेकर पहुंचा।मसला यूं सीधा सा था, आपसी सौहार्द्र से हल हो सकता था। पर नहीं हुआ जी।मैंने माफी मांगते हुए कहा-तो आज भुट्टे की जगह खरबूज खा लिये जायें।अच्छा तो भुट्टे और खरबूज में कोई फर्क नहीं है।नहीं फर्क तो है। पर एक दिन इसकी जगह उसे खा लें, तो क्या फर्क पड़ता है।अच्छा कोई फर्क नहीं पड़ता भुट्टे की जगह खऱबूज। कल को तो तुम यह भी कह सकते हो कि आज इस घर में ना आकर कहीं और चले जायें। मेरी जगह कोई और भी हो सकता है। कोई फर्क नहीं पड़ेगा तुम्हे। ये तुम्हे क्या हो गया है। तुम्हारे चरित्र को क्या हो गया है।बात खरबूजे से चलकर चरित्र पर आ जाती है।वैवाहिक जीवन कितनी बड़ी एब्सट्रेक्ट कविता है।कित्ती विकट एबस्ट्रेक्ट पेंटिंग है, जिसमें खरबूजे में भुट्टा घुसा हुआ है और भुट्टे में चरित्र।दरअसल सुनने में चूक हो गयी-मैंने फिर तर्क पेश किया।आजकल तुम मेरी सुनते ही कहां हो, पता नहीं किसकी सुनते हो-पलट जवाब आया।जब बातचीत इस फ्रीक्वेंसी पर पहुंच जाये, तो फिर स्पीकर फटने का डर हो जाता है। मैंने अपना स्पीकर आफ कर दिया।वरना जवाब तो अपने पास यह था कि –अब सब तो निराश हो चुके हैं, कोई इस काबिल नहीं समझता कि हमें सुनाये। सिर्फ तुम ही हो, जो अभी सुनाने का सम्मान देती हो।मेमोरी प्राबलम है साहब। अब इंसान की मेमोरी कित्ती, एक जीबी की भी न होगी, अगर कंप्यूटर की भाषा में कहें तो। इत्ते-इत्ते आइटम घुसे पड़े हैं, बास के मेमो, दफ्तर के डेमो, मेमोरी क्या करे।अभी एक अमेरिकन विद्वान से बात हो रही थी, उसने बताया कि चिंता न करें, इंसानी मेमोरी का इंतजाम कर रहे हैं। ऐसा जुगाड़मेंट होने वाला है, जिसमें बंदा सिर का ढक्कन खोलकर एक चिप डाल लेगा-ले बेट्टा हो गयी आठ सौ जीबी मेमोरी।टेंशन खत्म, पत्नी बात ही नहीं करेगी। पति काम कर रहा होगा, पीछे से उसका सिर खोलकर मेमोरी चिप निकालेगी, उस पर दर्ज कर देगी, इत्ते भुट्टे, उत्ते खरबूजे।हसबैंड दुकान पर जायेगा-दुकानदार हसबैंड का सिर खोलकर चिप पढ़ेगा और बांध देगा सब सामान।
भईया मजा सा आ लेगा।पर नहीं मामला इतना आसान नहीं है। यूं भी हो सकता है –किसी दिन हसबैंड सो रहा हो, उसका सिर खोलकर चिप में कुछ खुराफात कर दी जाये।अगले दिन संवाद कुछ यूं हों-इस बार मैरिज एनीवर्सरी पर कुछ गिफ्ट नहीं दी तुमने।पर मैरिज एनिवर्सरी तो 4 दिसंबर को आती है ना।लो तुम्हे कुछ याद रहता है, मेमोरी चिप चेक करो, 25 जून है।हसबैंड चिप निकालकर चेक करेगा, 25 जून निकलेगी।स्मार्ट बीबियां जब चाहे मैरिज एनीवर्सरी मना सकती हैं।एक तरकीब यह भी कि हसबैंड की मेमोरी चिप में से उसके सारे घरवालों को डिलीट कर दो।होशियार बहूरानी अपने पति की मेमोरी चिप से अपनी सास को ऐसा डिलीट कर सकती हैं, कि वह ट्रैश बाक्स में भी ना मिले।फिर सासू मां अपने बेटे से मिलने आयें।बेटा पूछे-माताजी किससे मिलना है।ऐसे सीन में बहूजी अपनी सास को गश खाकर गिरता भी देख सकती हैं।जिन रिश्तेदारों से बहूजी खुंदक खाती हों, उनके लिए और भी इंतजाम हो सकते हैं।मेमोरी चिप में सारे देवरों, जेठों की एंट्री बतौर कर्जदार कर दी जाये। जब भी जेठजी मिलने आयें,पतिदेव उनसे वसूली की बात कर उठें-जी हमारे पांच सौ करोड़ क्यों वापस नहीं करते।जेठजी गश खाकर गिर जायेंगे। दोबारा झांकेंगे भी नहीं।पति की तरफ के सारे रिश्तेदारों को इस तरह से मेमोरी चिप के जरिये भगाया जा सकता है।या फिर जेठजी की मेमोरी चिप में कुछ ऐसे खेल हो सकते हैं कि वे खुद ही दौड़े आयें और कहें की लो जी पांच करोड़ रुपये का कर्ज, जो मैंने आपसे लिया था। घर-दुकान सब बेचकर दे रहा हूं। चुन-चुनकर, गिन-गिनकर विरोधी पक्ष के रिश्तेदारों को ठिकाने लगाया जा सकता है।बस जी थोड़ा वेट कर लीजिये। इस चिप की पहली कापी मुझे ही मिलने वाली है।पुनश्च-अभी अमेरिका वाले एक्सपर्ट ने खबर दी है कि इस चिप को रिमोट के जरिये कंट्रोल किया जा सकता है, बिना सामने वाले की जानकारी के। यानी पति पत्नी एक-दूसरे की चिप में अपनी मर्जी की चिप-चिप कर सकते हैं।बुकिंग कराने के लिए फौरन संपर्क करें।पति और पत्नी अलग-अलग बुकिंग करायें, गोपनीयता की फुल गारंटी।और साहब सब छोड़िये कुछ शेर सुनिये, परवाज साहब के हैं-अपनी भूलों के लिए इतना भी मायूस न होकिससे होता है यहां फर्ज अदा, जाम उठामार डालेंगे तुझे होश के मारे हुए लोगजिद न कर, मान भी जा मेरा कहा, जाम उठा

वक़्त नही ...

वक़्त नही ...

हर ख़ुशी है लोगो के दामन मे
पर एक हसी के लिए वक़्त नही
दिन रात दौड़ती दुनिया मे
ज़िंदगी के लिए ही वक़्त नही

मा की लोरी का एहसास तो है
पर मा को मा कहने का वक़्त नही
सारे रिश्तो को तो हम मार चुके
अब उन्हे दफ़नाने का भी वक़्त नही

सारे नाम मोबाइल मे है
पर दोस्ती के लिए वक़्त नही
गैरो की क्या बात करे
जब अपनो के लिए ही वक़्त नही

आँखो मे है नींद बढ़ी पर
सोने का वक़्त नहीदिल है
गमो से भरा हुआ पर
रोने का भी वक़्त नही

पैसो की दौड़ मे ऐसे दौड़े
की थकने का भी वक़्त नही
पराए एहसान की क्या कदर करे
जब अपने सपनो के लिए ही वक़्त नही

तू ही बता ए ज़िंदगी
इस ज़िंदगी का क्या होगा
की हर पल मरने वालो को
जीने के लिए भी वक़्त नही

प्यास

प्यासे ही रहे

साहिल की रेत की तरह ,

दिन जलाए कभी

किरणे लपेटकर,

कभी सो गए

लहरे ओढ़ कर,

कितने कदम

दिल से होकर गुजरे,

कितनी स्मृतियाँ

राहों में गुम गयीं,

कितने किनारे

पानी में समा गए,

फिर भी

प्यासे ही रहे।


जिन्दगी तो थी वहीं

जिसके सायों को हमने

डूबते सूरज की आंखों मे देखा था,

उस बूढ़े पीपल की,

छाँव में ही, सुकून था कहीं,

उन नन्ही पगडंडियों से चलकर,

अब हम चौड़ी सड़कों पर आ गए,

हवाओं से भी तेज़,

हवाओं से भी परे,

भागते ही रहे,

फिर भी,

प्यासे ही रहे।


एक नन्हीं-सी चिंगारी

कहीं राख में दबी थी,

लपक कर उसने

किरणों को छू लिया,

सूखे पत्तों को आग दी,

हवाओं में उड़ा दिया,

कहीं अपना था कुछ

जिसे खो दिया,

और मोल ले लिया,

एक चमकता हुआ "कतरा"

डूबते रहे,

डूबते ही रहे,

फिर भी,

प्यासे ही रहे,

प्यासे ही रहे।

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जाने किस अनजान डगर से

पथिक बन तुम चले आए ..

चुपके से यूँ ही मेरी ज़िंदगी में

सुना मेरे दिल ने एक गीत नया

कोई

और अपने सारे प्यार से,

भर दी सारी तृष्णा तुम्हारे

प्यासे से मन की .. ..

जीवन हर पल बनता रहा

बादल कोई प्यार से उमड़ता हुआ

बरसाने को आतुर मेरा दिल

हर पल तलाशता रहा ..

तेरे दिल का हर कोना प्यासा-सा

लेकिन ...तुम आए और

फिर अचानक चल दिए अपनी

राह पर

मैं आज भी कर रही हूँ प्रतीक्षा

निर्जनता में सुनती शोर

अपने दिल की धड़कनों का

सोच रही हूँ उस प्यार के पलों

को

जिसके गहरे सागर में

अपना कुछ न बचा के

सब कुछ समर्पण कर दिया था

तुम्हें

अब तुम समझ के भी मेरे इन

गीतों को

कैसे समझ पाओगे

जिसे गा रही हूँ मैं तुम्हारे जाने

के बाद

एक अनबुझी प्यास जो दे गये

मेरे तपते मन को

वो बुझा रही हूँ अपने बहते


आँसुओ के साथ


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आँखों से ढलकर

सूखी जीभ पर अपना अस्तित्त्व

न्यौछावर करती

हलक़ से उतरकर

घूँट भर प्यास

सीने में

और

धीरे-धीरे

खून की हरेक नस में

समा जाती है ।

कभी - कभी यूँ भी

भर आती है प्यास बदन में

असरफ़ी कीअसरफ़ी जैसी आँखें

जिनमें, है चमक

सूरज की तपन की,

पेट में न जाने कब से

उबल रहे सूरज की

और सूरज जैसे कई

आग के गोलों की

जो कभी भी

फ़फ़क कर गिर सकते हैं

छाले से सजी हथेलियों पर ।

अँगूठा छाप ,

गँवारके ये हाथ ,

जो लिख नहीं सकते

एक अक्षर भी

कागज़ पर,

पर लिखते हैं

रोज़चेहरे पर

परिभाषा दो घूँट प्यास की ।

रोज़ तो पी जाता है वह

एक कतरा प्यास

खून की हर घूँट के साथ !

न प्यास बुझती ,

न आग ।

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है कौन यहाँ जिसे प्यास नहीं है,

जीने की किसे आस नहीं है...

प्यास जहाँ हो चाहत की,

ज़िन्दा दफ़नाए जाते हैं,

हर दिल में मुमताज की खातिर,

ताज़ बनाए जाते हैं...

वीरान है वो दिल जिसमें

मुमताज नहीं है

है कौन यहाँ जिसे प्यास नहीं है,

प्यास जहाँ हो पिया मिलन की

वहाँ स्वप्न संजोये जाते हैं

प्रियतम से मिलने की चाहत में

नैन बिछाये जाते हैं

प्यासे नैनों में आँसू की थाह नहीं है

है कौन यहाँ जिसे प्यास नही है

प्यास जहाँ हो बस जिस्म की

दामन पे दाग लगाये जाते हैं,

कुछ पल के सुख की खातिर

हर पल रुलाये जाते हैं

माटी के तन की बुझती प्यास नहीं है

है कौन यहाँ जिसे प्यास नहीं है

प्यास जहाँ हो दौलत की,

कत्ल खूब कराये जाते हैं,

अपने निज स्वार्थ की खातिर,

दिल निठारी बनाये जाते हैं...

खून बहा कर भी मिलती एक सांस नहीं है

है कौन यहाँ जिसे प्यास नही है,

प्यास जहाँ हो शोहरत की,

रिश्ते भुलाये जाते हैं,

एक नाम को पाने की खातिर,

हर नाम भुलाये जाते हैं

भाई से भाई लड़े रिश्तों में आँच नहीं है

है कौन यहाँ जिसे प्यास नहीं है

प्यास जहाँ हो वतन की,

वहाँ शीश नवाये जाते हैं,

धरती माँ के मान की खातिर,

सर कलम कराये जाते हैं

आज़ादी की रहती किसको आस नहीं है

है कौन यहाँ जिसे प्यास नहीं है

है कौन यहाँ जिसे प्यास नहीं है

जीने की किसे आस नहीं है॥


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तुम मधुशाला के प्रेमी हो,
तुम को प्यास से क्या लेना,
पत्थर दिल पत्थर भाव हैं फिर,
मन के अहसास से क्या लेना

गूँज रही है जहाँ ध्वनि,
मधु के प्यालों के चुम्बन की
और जहाँ पर लगी प्रदर्शनी,
नारी देह और यौवन की
कौन विवशता किन्तु समझता
उसके मन की और जीवन की

तुम खुद ही भीड में शामिल हो
उसके उपहास से क्या लेना...
पत्थर दिल पत्थर भाव हैं फिर,
मन के अहसास से क्या लेना

मर्यादा की चिता सजी,
तुमचल कर अग्नि प्रदान करो
चाहे मानवता भी लज्जित हो
तुम नैतिकता बलिदान करो
चाहे जितनी चीख-पुकार मचे
पर तुम केवल मद-पान करो

तुमको पीना सदा मुबारक
दुःख-सुख, परिहास से क्या लेना..
पत्थर दिल पत्थर भाव हैं फिर
,मन के अहसास से क्या लेना

चाहे मन को दुःख का भार मिले
चाहे खुशियाँ अपरम्पार मिले
होली या दीप दीवाली हो
चाहे कोई भी त्यौहार मिले

जीवन के कदम-कदम पर तुम
चाहे जीत मिले या हार मिले
संकोच बाँटने को कोई, साथी हो
चाहे न होमधुशाला,मधु, साकीबाला बस

तुमको बारम्बार मिलेजो
खुद को बाँध चुके तुमसे
उनके विश्वास से क्या लेना..
पत्थर दिल पत्थर भाव हैं फिर,

मन के अहसास से क्या लेना
"मन" के अहसास से क्या लेना